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पश्चिम एशिया में फिर तनाव: होर्मुज में सात तेल टैंकरों पर हमले का दावा, ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?

Thu, 22 Oct 2026 04:13 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

होर्मुज में सात तेल टैंकरों में आग लगने या नुकसान पहुंचने का दावा ईरान ने किया है। अमेरिका पश्चिम एशिया में तीसरा विमानवाहक पोत और हजारों सैनिक भेज रहा है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की चेतावनी भी दी है। ऐसे में क्या अमेरिका और इस्राइल के साथ फिर युद्ध शुरू होगा? क्या होर्मुज में तनाव बढ़ने से भारत समेत दुनिया में तेल और गैस महंगी हो सकती है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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क्या ईरान-अमेरिका में फिर छिड़ेगी जंग? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध का खतरा बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रात के दौरान सात तेल टैंकरों में आग लग गई या उन्हें नुकसान पहुंचा है। ईरान के मुताबिक, जहाजों पर हमला किया गया या वे समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराए। इस बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में मदद जारी रखी, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, जहाजों को नुकसान पहुंचने के ईरान के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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होर्मुज में सात तेल टैंकरों के साथ क्या हुआ?
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के हवाले से जहाजों पर हमले की जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, सात तेल टैंकर आग की चपेट में आए या क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि, इसमें किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दी गई। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी संस्था यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी इन हमलों की सूचना नहीं दी। हाल के दिनों में निगरानी करने वालों ने कहा है कि कुछ जहाज संचालक घटनाओं की जानकारी देने से हिचक रहे हैं। इसलिए इन हमलों को लेकर ईरान के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, एक ही रात में सात जहाजों के प्रभावित होने के दावे ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में मदद करता रहा, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। ईरान इस समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता है। यह जलमार्ग उसके लिए अमेरिका के साथ युद्ध और बातचीत, दोनों में दबाव बनाने का अहम साधन है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा कि उनका देश कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन अपनी रक्षा करने से पीछे नहीं हटेगा। इस तरह तेहरान ने बातचीत की संभावना खुली रखने के साथ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
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क्या अमेरिका और इस्राइल के साथ फिर युद्ध शुरू हो सकता है?
अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के फिर भड़कने की आशंका बढ़ रही है। इस्राइल में कुछ ही दिनों में चुनाव होने हैं, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती मिल सकती है। वहीं, अगले महीने अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं। युद्ध से जुड़ी महंगाई के कारण अमेरिकी मतदाताओं में नाराजगी बढ़ी है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी नई सैन्य कार्रवाई का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ दोनों देशों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में संघर्ष बढ़ने पर समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल और डेटा सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में क्या सैन्य तैयारी की है?
अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। वह तीसरा विमानवाहक पोत और हजारों सैनिक भेज रहा है। इसके साथ अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की बड़ी तैनाती की जा रही है। इस बीच मध्यस्थ अमेरिका और ईरान को दोबारा औपचारिक बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें मान ले, तो एक सप्ताह के भीतर युद्ध खत्म किया जा सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उसकी शर्तों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना भी शामिल है। ये शर्तें जून में हुए उस समझौते से मिलती-जुलती हैं, जो दोनों देशों के बीच सहमति बनने के कुछ ही दिनों बाद टूट गया था।

ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव क्यों ठुकराया और क्या होगा असर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन वाले नए प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। हालांकि, दोनों पक्षों ने माना है कि उनके बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। प्रस्ताव खारिज होने के बाद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमले बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। यदि फिर बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू होता है, तो इससे पश्चिम एशिया के आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस क्षेत्र से उर्वरक जैसे जरूरी उत्पादों की आपूर्ति भी बाधित होने का खतरा रहेगा। तेल और गैस की आपूर्ति में रुकावट आने से कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है।

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