अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ छह महीने से अधिक समय से चल रहे टकराव को युद्ध मानने से इनकार किया है। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस विचार का समर्थन करते हुए कहा, ईरान और अमेरिका के बीच 'अंतराल वाला सैन्य संघर्ष' हो रहा है जो वाशिंगटन के लिए 'छोटी बात' है। उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका ईरान के भूमिगत परमाणु स्थल 'पिकैक्स माउंटेन' पर जल्द हमला कर सकता है। ईरान के अत्यधिक किलेबंद और भूमिगत परमाणु स्थल 'पिकैक्स माउंटेन' पर हमले का बयान ऐसे समय में आया है जब बीते कुछ दिनों में दोनों देशों ने एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को जमकर निशाना बनाया है। ऐसे में दोनों देशों का टकराव बढ़ने का खतरा है।
क्या बहुत जल्द हमला कर सकता है अमेरिका?
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका को पिकैक्स माउंटेन पर कोई गतिविधि मिलती है, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी खुफिया तंत्र इस स्थल पर गतिविधियों की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
कहां है ईरान का परमाणु भंडार?
पिकैक्स माउंटेन ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन सुविधा के पास स्थित है। इसे दो गहरी दबी सुरंग प्रणालियों वाला अत्यधिक किलेबंद भूमिगत परिसर बताया जाता है। कुछ दिन पहले आई वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल ने ईरान से जुड़ा चौंकाने वाला दावा किया है। इस्राइल की खुफिया जानकारी के अनुसार, हजारों सेंट्रीफ्यूज इस गहरी दबी सुविधा में स्थानांतरित कर दिए हैं। इस भूमिगत निर्माण के कारण पारंपरिक हवाई बमबारी का असर नहीं होता है। पिकैक्स माउंटेन काफी अधिक प्रतिरोधी है।
अमेरिकी सेना के हमलों पर ट्रंप के तर्क क्या?
ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में तर्क दिया कि अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के कारण पश्चिम एशिया में एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, यदि अमेरिका कार्रवाई नहीं करता तो इस्राइल और इसके आसपास अन्य देशों को अधिक गंभीर खतरे का सामना करना पड़ता। सैन्य कार्रवाई को ईरान के ठिकानों पर अंजाम देने वाली एजेंसी- अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने बताया था कि सेना ने पिछले सप्ताह ईरानी सैन्य ठिकानों के पर हमले का एक लहर चरण पूरा किया है। इन अभियानों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने जिन जगहों पर बमबारी की, उनमें ईरान का वायु रक्षा प्रतिष्ठान, रडार प्रणालियां, समुद्री संपत्तियां, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताएं और संचार स्थल जैसे केंद्र शामिल हैं।
ईरान ने क्या प्रतिक्रिया दी, किन देशों में रडार पर हमले?
सेंटकॉम के मुताबिक IRGC द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के जवाब में अमेरिकी सेना ने हमले किए। वाणिज्यिक जहाज और अमेरिकी सैन्यकर्मियों के खिलाफ "हमले के प्रयासों" के बाद सेंटकॉम ने मुंहतोड़ जवाब दिया। ट्रंप ने ईरानी रडार प्रणालियों पर हमलों के बारे में भी दावा किया कि अमेरिकी बलों ने दो बार अत्याधुनिक रडार प्रतिष्ठानों को नष्ट किया। इन हमलों के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर "जबरदस्त हमले" किए ।
होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति?
वेंस की बात के समर्थन में दलील देते हुए ओवल ऑफिस में ट्रंप ने कहा, ईरान के साथ टकराव की वर्तमान स्थिति पिछली लंबी अमेरिकी लड़ाइयों से अलग है। उन लड़ाइयों में अमेरिकी बहुत अधिक संख्या में हताहत हुए थे। ट्रंप ने वियतनाम युद्ध का उदाहरण दिया, जहां 1,00,000 लोग मारे गए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान टकराव "अंतराल वाला" है, क्योंकि अमेरिका लगातार लड़ने के बजाय हमले कर रहा है। अमेरिकी सेना ने विमान और अन्य सैन्य संपत्तियों को भी नष्ट किया। ईरान इनका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य की रक्षा के लिए करता था। ऐसे में अमेरिकी बलों ने क्षेत्र में कई नावों और जहाजों पर भी हमला किया। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिलहाल अमेरिका नियंत्रित कर रहा है। ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष में जान गंवाने वाले 18 अमेरिकी लोगों के नुकसान की तुलना वेनेजुएला से की। उन्होने कहा, वहां कोई नुकसान नहीं हुआ था।