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शांति की तरफ जाएं या तेज करें युद्ध: ईरानी रणनीति में उलझे ट्रंप, सैन्य दबाव बढ़ा रहे लेकिन साफ योजना का अभाव

Sat, 28 Mar 2026 07:09 AM IST
Pavan अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन

सार

West Asia Crisis: ईरान के खिलाफ अमेरिका की तरफ से छेड़ा गया जंग उसके गले की फांस बनता जा रहा है। दरअसल, युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप उलझन को देखकर ये साफ पता चल रहा है कि वो शांति की तरफ जाएं या युद्ध तेज करें। इस सबके पीछे ईरान की मजबूत रणनीति मानी जा रही है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के रास्ते तलाशते दिख रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति अस्पष्ट  है। एक ओर अमेरिका सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, वहीं तेहरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजकर चर्चा के प्रयास कर रहा है। व्हाइट हाउस के सख्त बयानों और कूटनीतिक पहल ने संकेत दिया है कि ट्रंप प्रशासन अभी तक तय नहीं कर पाया है कि युद्ध को तेजी से खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाए या वार्ता करे।
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बीबीसी पर्शियन की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने हालात से निपटने के लिए दो समानांतर कदम उठाए हैं। पेंटागन ने क्षेत्र में जमीनी सैनिक भेजने का आदेश दिया। जल्द 2000 पैराट्रूपर्स खार्ग के नजदीक पहुंचेंगे, जबकि अमेरिकी वार्ताकारों ने ईरान को नया 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव सौंपा। अगले ही दिन व्हाइट हाउस ने ईरान को चेताया कि अगर उसने प्रस्ताव नहीं माना तो उस पर पहले से भी ज्यादा कठोर हमला किया जाएगा।
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होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ी चुनौती
युद्ध के तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अमेरिका अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को कैसे सुरक्षित किया जाए, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस का निर्यात होता है। ईरान के हमलों के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा बढ़ा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है।
पूर्व एनएसए स्टीफन हैडली ने कहा कि अगर यह जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में रहता है, तो ट्रंप के लिए जीत का दावा करना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी देशों से पर्याप्त परामर्श न करने के चलते अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में कठिनाई हो रही है।

रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद गहराए
अमेरिकी कांग्रेस में भी इस युद्ध को लेकर मतभेद उभरे हैं। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने विश्वास जताया कि सैन्य अभियान जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन उनकी पार्टी के कुछ सदस्य इससे असहमत दिखे। रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने 2,000 से अधिक पैराट्रूपर्स की तैनाती का विरोध करते हुए कहा कि वह ईरान में जमीनी सैनिक भेजने का समर्थन नहीं करेंगी। वहीं, हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन माइक रोजर्स ने भी पेंटागन पर पर्याप्त जानकारी न देने का आरोप लगाया।

जमीनी सैनिकों की तैनाती, दबाव या जोखिम
अमेरिका द्वारा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों की तैनाती को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। संभावित योजना में फारस की खाड़ी स्थित खार्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करना शामिल हो सकता है, जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। इसकी अधिकारियों को उम्मीद है।
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अनिश्चितता के बीच आगे की स्थिति
ट्रंप प्रशासन एक तरफ सैन्य दबाव बढ़ाकर तेजी से निर्णायक बढ़त हासिल करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान भी तलाश रहा है। लेकिन ईरान के सख्त रुख, अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी और घरेलू राजनीतिक मतभेदों के बीच यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें सफलता मिलेगी या नहीं।

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