युद्ध के चलते कतर में फंसा एक भारतीय युवक सुरक्षित अपने घर पहुंच गया है। दरअसल कतर में फंसे होने के दौरान युवक को ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद भारतीय दूतावास और सिख संगठनों ने मिलकर युवक को सुरक्षित घऱ पहुंचाया।
पश्चिम एशिया संकट के चलते खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। ऐसे मुश्किल समय में कतर में एक भारतीय नागरिक परमिंदर को ब्रेन स्ट्रोक आ गया, जिससे उसकी जान पर बन आई। एक तो पराया देश और ऊपर से जानलेवा खतरा, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में मानवता की मिसाल पेश करते हुए लोगों ने परमिंदर की मदद की। भारतीय दूतावास ने भी मदद दी और बाद में कतर सरकार के सहयोग से परमिंदर सुरक्षित स्वदेश लौट आया है।
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कनाडा जाते हुए कतर में फंसा युवक
भारतीय युवक परमिंदर कनाडा जा रहा था, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते उसकी यात्रा बाधित हो गई और वह कतर में फंस गया। कतर में रहने के दौरान ही परमिंदर को ब्रेन स्ट्रोक आया, लेकिन कतर सरकार, कतर में भारतीय मिशन और कई सामुदायिक संगठनों की मदद से परमिंदर की घर वापसी संभव हुई।
कतर में भारतीय दूतावास और सामुदायिक संगठनों की मदद
कतर में भारतीय राजदूत विपुल ने दूतावास के प्रथम सचिव ईश सिंघल के साथ मिलकर स्थानीय और सामुदायिक संगठनों की मदद से परमिंदर की सहायता की। इंडियन कम्युनिटी बेनेवोलेंट फोरम, पुनर्जनी और सिंह सेवा ग्रुप कतर जैसे संगठनों ने परमिंदर की नियमित देखभाल की और उसके मेडिकल खर्चों और खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा। कतर के हमास मेडिकल कॉर्पोरेशन और कतर एयरवेज ने भी परमिंदर की स्वदेश वापसी में मदद की।
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कतर के हमास मेडिकल कॉर्पोरेशन और कतर एयरवेज ने भी परमिंदर की स्वदेश वापसी में मदद की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बात भी की। इस बातचीत में पीएम मोदी ने कतर के नेता को भारतीय समुदाय की देखभाल करने और सहयोग के लिए आभार जताया। पश्चिम एशिया संकट की जद में कतर भी है और कतर के ऊर्जा ठिकानों पर हमले हुए हैं।