ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने पुष्टि की कि एक हमले में उसके वरिष्ठ अधिकारी जमशीद इशागी की मौत हो गई। वह ईरान की सशस्त्र सेनाओं में मेजर जनरल थे और जनरल स्टाफ प्रमुख के सलाहकार भी थे। आईआरजीसी के बयान के अनुसार, इस हमले में इशागी के साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए, लेकिन हमले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
इससे पहले ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया था कि आईआरजीसी नौसेना के कमांडर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी का अंतिम संस्कार सोमवार को होगा, जो एक इस्राइली हमले में मारे गए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंदी को मुख्य रूप से एशिया और यूरोप के लिए एक समस्या बताया है। इस मार्ग से 84 फीसदी तेल का निर्यात एशियाई बाजारों के लिए होता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अब पश्चिम एशिया की ऊर्जा पर उतना निर्भर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दूसरे देशों के पास विकल्प है कि वे अमेरिका से तेल खरीदें या होर्मुज जलडमरूमध्य खुलवाने की हिम्मत दिखाएं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका टैंकरों को सुरक्षा प्रदान करने या जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बहुराष्ट्रीय प्रयास करने पर विचार कर सकता है, लेकिन ये तत्काल प्राथमिकताएं नहीं हैं। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि ईरान में अभियान ने आधे चरण से अधिक को पार कर लिया है और अब ध्यान उसके संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करने या अपनी सुरक्षा में लेने पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे। अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा कि हमले का प्रमुख उद्देश्य ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना था, जिसे लगभग हासिल कर लिया गया है। इसलिए वह चार से छह सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त करने के लिए तैयार है, भले ही होर्मुज जलमार्ग प्रभावी ढंग से बंद ही क्यों नहीं रहे। इस निर्णय से होर्मुज जलमार्ग पर ईरान का नियंत्रण और बढ़ जाएगा। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति का मानना है कि अमेरिका एक लंबे समुद्री जलमार्ग को बंद करने के अभियान में उलझे बिना अपने मुख्य सैन्य लक्ष्यों को प्राप्त करके जीत की घोषणा कर सकता है।
ईरानी संसद की सुरक्षा समिति ने सोमवार (स्थानीय समय) को होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना को मंजूरी दे दी, जिसमें रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने के उपाय शामिल हैं। यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) ने दी है। आईआरआईबी के अनुसार, योजना में अमेरिकी, इस्राइली और ईरान के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों में शामिल देशों के जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया है और जलडमरूमध्य के लिए कानूनी ढांचा स्थापित करने में ओमान के साथ सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई है। इससे पहले, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण हासिल करने जा रहा है, जिससे अंततः वहां नौवहन की स्वतंत्रता होगी।
चीन और पाकिस्तान ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए पांच-बिंदुओं वाला शांति प्रस्ताव पेश किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये जहाजों के सुरक्षित संचालन की भी मांग शामिल है। यह प्रस्ताव चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक दर के बीच ईरान की स्थिति पर हुई बैठक के बाद आया।
ठक के दौरान डार ने वांग को तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी हाल की बातचीत के बारे में बताया, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकने और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।
प्रस्ताव में संघर्ष तुरंत रोकने, जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करने, गैर-सैन्य लक्ष्यों और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्राथमिकता बनाए रखने की बातें शामिल हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और इसके आस-पास के पानी को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा का अहम नौवहन मार्ग माना जाता है।
अमेरिका और इस्राइल ने तेहरान और ईरान के कई शहरों में हमले किए। तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनी गईं, पूर्वी पिरोजी जिले में बिजली गुल हो गई और एक अधिकारी के हवाले से ईरानी मीडिया ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी ईरानी शहर जंजन में एक शिया मुस्लिम सभा भवन पर हुए हमले में तीन लोग मारे गए। वहीं, इस्राइली ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में उसके चार सैनिक मारे गए हैं।
ईरान ने खाड़ी देशों में कई ठिकानों पर हमले किए। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की तरफ से दुबई पर दागे गए एक ड्रोन को हवा में मार गिराया, लेकिन एक आवासीय क्षेत्र में उसका मलबा गिरने से चार लोग घायल हो गए। दुबई में एक अन्य हमले में जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई। बहरीन में हवाई हमले के सायरन बजे, जबकि सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपनी राजधानी की ओर दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका। ईरान ने इस्राइली शहरों में भी मिसाइलों से हमला किया, जिसके बाद सायरन की आवाजें गूंजती रहीं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में सिर्फ अमेरिकी सेनाओं को निशाना बना रहा है।
ईरान ने दुबई के तट से दूर समुद्र में एक कुवैती झंडे वाले तेल टैंकर अल-सलमी पर ड्रोन से हमला किया। इससे टैंकर में आग लग गई, जिसे बाद में बुझा दिया गया। कुवैत तेल कॉर्पोरेशन ने कहा कि टैंकर से तेल रिसाव नहीं हुआ, लेकिन उसके ढांचे को नुकसान पहुंचा है। यह टैंकर 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर चीन जा रहा था। ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने एक कंटेनर जहाज पर हमले की बात कही, जो अल-सलमी के पास ही लंगर डाले था। इससे लगता है कि तेल टैंकर अनायास ही हमले का शिकार हो गया।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष खत्म होने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे। युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत का दावा करने वाले अमेरिका ने ईरान के केंद्रीय शहर इस्फहान पर 2,000 पाउंड (लगभग 1,000 किलोग्राम) के बंकर बस्टर बम गिराए हैं। यह शहर ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ईरान ने दुबई के तट के पास तेल से भरे एक टैंकर पर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई। ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग खुले बिना भी ईरान युद्ध से बाहर निकलने के संकेत दिए हैं।
अमेरिका की तरफ से जमीन के अंदर सुरक्षित संरचनाओं को नष्ट करने में सक्षम बम से हमले के बाद इस्फहान शहर में आग का एक विशाल गुब्बार उठते दिखाई दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमले से परमाणु स्थल को किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं है, क्योंकि यह हमला स्थल से लगभग 20 किमी दूर है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें इस्फहान हमले को दिखाया गया है। नासा के उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों से पता चलता है कि विस्फोट शहर के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र में हुए थे। ईरान ने हमले की पुष्टि नहीं की है। इस्फहान ईरान के तीन परमाणु संवर्धन स्थलों में से एक है, जिस पर पिछले साल जून में 10 दिनों के युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने हमला किया था। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने अपने अधिकांश उच्च संवर्धित यूरेनियम को यहीं छिपा कर रखा है। ईरान ने हमले की पुष्टि नहीं की है।
ईरान की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने मंगलवार को इस्फहान के पास एक एमक्यू-9 ड्रोन को निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि ये ड्रोन अमेरिका-इस्राइल का है। ईरानी सेना के हवाले से मीडिया ने बताया कि ड्रोन को इंटरसेप्ट कर तबाह कर दिया गया। ईरान ने अमेरिका-इस्राइल के अब तक कुल 146 ड्रोन तबाह करने का दावा किया है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन बेहद खास है और इसे आमतौर पर सर्विलांस और हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह एक महंगा ड्रोन है और इस एक ड्रोन की कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर के करीब है।
ईरान ने कुवैत के तेल टैंकर को निशाना बनाया है। सोमवार को दुबई के बंदरगाह पर कुवैत के तेल टैंकर पर हमला किया गया, जिससे टैंकर में आग लग गई। इस हमले के चलते समुद्र में तेल फैलने का खतरा भी पैदा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है।
ईरान के इस्फहान शहर में धमाके हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। ईरान के इस्फहान शहर की आबादी करीब 23 लाख है और यहीं पर ईरानी सेना का बद्र सैन्य अड्डा भी है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस्फहान के हथियार डिपो पर 2000 किलो वजनी बंकर बस्टर बम से हमला किया। इस्फहान में ही ईरान का संवर्धित यूरेनियम का भंडार भी रखा है। बीते साल जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब भी इस्फहान में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
ईरान की राजधानी तेहरान में कई इलाकों में अंधेरा छा गया है। दरअसल हमलों में तेहरान के बिजली प्लांट्स को नुकसान पहुंचा है, जिससे पूर्वी तेहरान में कई इलाके बिना बिजली के रहने के मजबूर हैं। वहीं ईरान के समर्थन में इराक के उग्रवादी संगठनों ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बीते दिन 19 हमले किए। इनमें कई ड्रोन हमले शामिल हैं।
इस्राइली सेना ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में ऑपरेशन के दौरान चार और इस्राइली सैनिकों की मौत हो गई है। इसके साथ ही दक्षिणी लेबनान में बीती 2 मार्च से अब तक ऑपरेशन के दौरान जान गंवाने वाले इस्राइली सैनिकों की संख्या 10 हो गई है।
भारत ने लेबनान में UN शांति सैनिकों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि शांति सैनिक मुश्किल हालात में काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सबसे जरूरी होनी चाहिए। भारत ने मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी।
सऊदी अरब, UAE, कुवैत और बहरीन जैसे देशों ने अमेरिका से कहा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी जाए। उनका मानना है कि ईरान अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है और दबाव बनाए रखना जरूरी है।
ईरान की संसद ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नया नियम मंजूर किया है। इसके तहत वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जाएगा। साथ ही अमेरिकी और इस्राइली जहाजों के प्रवेश पर रोक लगाने की भी बात कही गई है।
दक्षिणी लेबनान में एक विस्फोट में UN के दो शांति सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए। यह हमला बानी हय्यान इलाके में हुआ। UN ने कहा कि शांति बनाए रखने वाले लोगों की जान जाना बेहद दुखद है और ऐसा नहीं होना चाहिए।
लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में इस्राइली बलों पर कुल 43 हमले किए हैं। समूह के अनुसार, इनमें से 26 हमले लेबनान की सीमा के अंदर मौजूद इस्राइली सैनिकों पर किए गए, जबकि 17 हमले उत्तरी इस्राइल में हुए। हिजबुल्ला ने कहा कि इन हमलों में चार सैन्य ठिकानों, आठ बस्तियों, एक सैन्य बैरक और सीमा पर बनाए गए चार नए पोस्ट को निशाना बनाया गया।
दुबई के समुद्री इलाके में एक कुवैती तेल टैंकर में आग लगने की घटना सामने आई है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार, अल सलमी नाम का यह बड़ा कच्चा तेल टैंकर ईरानी हमले का निशाना बना, जिससे जहाज को नुकसान हुआ और उसमें आग लग गई। बताया गया कि घटना के समय टैंकर पूरी तरह तेल से भरा हुआ था, जिससे आसपास के समुद्र में तेल फैलने का खतरा भी पैदा हो गया है।
दुबई प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि यह घटना एक ड्रोन हमले से जुड़ी है, लेकिन राहत की बात यह है कि इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है। दुबई मीडिया ऑफिस के मुताबिक, समुद्री दमकल टीमें मौके पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं।
लेबनानी समूह हिजबुल्लाह ने कहा है कि उसके लड़ाकों ने उत्तर इस्राइल में एक बेस और दक्षिण लेबनान में इस्राइली सैनिकों पर हमला किया। हिजबुल्ला ने बताया कि उसने रोश पिना के दक्षिण में फिलोन बेस पर ड्रोन से हमला किया। इसके अलावा अल-बैय्यादा शहर के राडार इलाके में इज़राइली सैनिकों और वाहनों पर रॉकेट और तोपखाने से हमला किया। समूह ने कहा कि उसने नाकोरा बंदरगाह के पास इस्राइली सैनिकों पर ड्रोन हमला किया और उत्तर इस्राइल के नहरिया इलाके पर रॉकेट से भी हमला किया।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा है कि देश के दुश्मन अपनी इच्छाओं को खबरें बताकर और एक ही समय में धमकियां देकर ईरान को चुनौती दे रहे हैं। गालिबाफ ने एक्स पर लिखा कि यह दुश्मनों की बड़ी गलती होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई दुश्मन ईरान पर हमला करेगा, तो ईरानी कई गुना जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में ईरानी लोग अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे और दुश्मनों को उनके आक्रामक कदमों पर पछतावा कराएंगे।