ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को दावा किया कि उसने देश के अहवाज क्षेत्र में अमेरिका के एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने ईरान के एकीकृत वायु रक्षा नेटवर्क की मदद से इस ड्रोन को निशाना बनाया। यह दावा ऐसे समय में किया गया है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
अमेरिका को दी सख्त चेतावनी
ईरान के केंद्रीय खातम अल-अनबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही ने कहा कि अगर अमेरिका ने किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई की तो ईरान की सेना उसका 'निर्णायक और विनाशकारी जवाब' देगी। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत देश की सुरक्षा की गारंटी है और किसी भी धमकी का जवाब पूरी मजबूती से दिया जाएगा। अब्दोल्लाही ने आरोप लगाया कि अमेरिका लगातार सैन्य असफलताओं के बाद ईरान की जनता और सरकार के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की एकता ही इस साजिश को नाकाम करेगी।
ईरान का दावा- जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में भी किए हमले
आईआरजीसी ने शनिवार को दावा किया था कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी अल-अजराक एयरबेस, कुवैत के बंदर अल-अहमदी स्थित ईंधन आपूर्ति केंद्र और बहरीन के एक डेटा सेंटर को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि जॉर्डन में हुए हमले में कम से कम दो लड़ाकू विमान और तीन अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हुए, जबकि कुवैत में अमेरिकी संचार केंद्र और बहरीन में खुफिया डेटा सेंटर को भी नुकसान पहुंचाया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका ने भी जारी रखी कार्रवाई
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार सातवीं रात भी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिका के अनुसार, इन हमलों में निगरानी केंद्रों, सैन्य लॉजिस्टिक ढांचे, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। इसके लिए लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल किया गया। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं।
दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि नहीं
ईरान और अमेरिका दोनों एक-दूसरे पर लगातार हमलों के दावे कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए वास्तविक नुकसान और घटनाओं की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।