पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने करीब सात देशों से युद्धपोत भेजकर होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की मांग की है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह समुद्री मार्ग उन देशों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो पश्चिम एशिया से तेल आयात करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं उन देशों से कह रहा हूं कि वे खुद अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनके लिए ज्यादा जरूरी है।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। आमतौर पर दुनिया के कुल कारोबार वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतें भी तेजी से ऊपर जा रही हैं।
अमेरिका को होर्मुज की उतनी जरूरत नहीं- ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस रास्ते की उतनी जरूरत नहीं है क्योंकि उसके पास खुद के तेल के स्रोत हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन को लगभग 90% तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को बहुत कम तेल यहां से आता है। बता दें कि ट्रंप पहले ही कई देशों से इस मिशन में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। इनमें चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन है। हालांकि इस मामले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने ट्रंप से बातचीत में कहा कि वैश्विक शिपिंग को सुरक्षित बनाने के लिए इस समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य करना जरूरी है, लेकिन अभी तक ब्रिटेन ने अपने युद्धपोत भेजने का फैसला नहीं किया है।
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अब समझिए ईरान का स्टैंड
हालांकि इन सभी दावों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने के लिए तेहरान से संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि कुछ देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति भी दी गई है, हालांकि उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए। ईरान का कहना है कि यह समुद्री मार्ग सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं।
कई देश अभी भी सतर्क, क्या है इसके मायने?
उधर, अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि वह कई देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं और उम्मीद है कि चीन भी इस रास्ते को सुरक्षित बनाने में सहयोग करेगा। हालांकि कई देशों ने फिलहाल कोई ठोस वादा नहीं किया है। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह स्थिति पर नजर रख रहा है और अमेरिका के साथ समन्वय बनाए रखेगा। वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने साफ कहा कि जर्मनी इस युद्ध का सक्रिय हिस्सा बनने की योजना नहीं बना रहा।
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तेल की कीमतें नियंत्रित करने की कोशिश
गौरतलब है कि वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। एजेंसी के अनुसार लगभग 41.2 करोड़ बैरल तेल बाजार में छोड़ा जाएगा ताकि बढ़ती कीमतों को कम किया जा सके। एशियाई देशों के भंडार तुरंत जारी होंगे, जबकि यूरोप और अमेरिका के भंडार मार्च के अंत से बाजार में आएंगे। इस युद्ध का असर पूरे क्षेत्र में दिख रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार ईरान में अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
वहीं इस्राइली में ईरानी मिसाइल हमलों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा लेबनान में भी संघर्ष तेज हो गया है, जहां सैकड़ों लोग मारे गए और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कुल मिलाकर पश्चिम एशिया में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।