पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच पूर्व अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने कहा कि अमेरिकी सेना कुशल है, लेकिन युद्ध का अंतिम लक्ष्य अस्पष्ट है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह सैनिकों के लिए खतरा है और प्रशासन की रणनीति लगातार बदल रही है।
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब अपने दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसके बाद भी ये संघर्ष कम होने के बजाय और भयावह रूप लेता नजर आ रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के ईरान के साथ युद्ध को लेकर चिंता व्यक्त की है। साथ ही ट्रंप की ईरान के साथ युद्ध नीति की आलोचना भी की है। उन्होंने कहा है कि युद्ध एक स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य के बिना भटक सकता है, भले ही अमेरिकी सैन्य अभियान सामरिक स्तर पर सफल दिख रहे हों।
सुलिवन ने सीएनएन के शो 'फरेद जकारिया जीपीएस' में कहा कि अमेरिकी सेना बहुत कुशल, साहसी और पेशेवर है, लेकिन युद्ध का अंतिम उद्देश्य अब भी साफ नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा पैदा कर रहा है, और अब तक सात सैनिकों की जान जा चुकी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने युद्ध के लिए कई अलग-अलग वजहें बताई हैं, लेकिन कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है, और यह समय के साथ बदलती रहती हैं।
रणनीति की कमी और बड़े जोखिम की संभवना
सुलिवन ने आगे कहा कि युद्ध के शुरुआती एक हफ्ते से भी ज्यादा समय बाद अस्पष्ट रणनीति एक गंभीर जोखिम है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की वेनेजुएला में पहले की कार्रवाई से गलत सबक लेने की भी आलोचना की। उनका कहना है कि इससे यह संदेश जा सकता है कि अमेरिका कहीं भी, किसी भी समय सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकता है।
यूक्रेन और चीन पर असर
इसके अलावा पूर्व सलाहकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू करने का फैसला यूक्रेन के लिए अमेरिका के समर्थन को कमजोर करता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह युद्ध भू-राजनीति में खतरनाक मिसाल बना सकता है, और चीन इसे यह सोचकर देख सकता है कि ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करने की उसकी क्षमता बढ़ गई है। सुलिवन ने निष्कर्ष निकाला कि युद्ध के बिना स्पष्ट रणनीति के जारी रहने से न सिर्फ अमेरिकी सैनिक खतरे में हैं, बल्कि यह दुनिया भर में बड़े देशों के लिए गलत संदेश भी भेज सकता है।