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ईरान की शर्तों से बढ़ी हलचल: ट्रंप अचानक लौटे व्हाइट हाउस, अमेरिकी बमवर्षक पश्चिम एशिया रवाना; अब आगे क्या?

Sun, 20 Sep 2026 07:40 AM IST
देवेश त्रिपाठी एएनआई, वॉशिंगटन

सार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय नए घटनाक्रम सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कैंप डेविड में अपना प्रवास छोटा कर व्हाइट हाउस वापसी की। वहीं, ईरान ने बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सात मांगें सामने रखी हैं। इनमें युद्ध रोकने, जब्त धनराशि जारी करने और समुद्री नाकाबंदी खत्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं।
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पश्चिम एशिया तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैंप डेविड में अपना सप्ताहांत प्रवास बीच में ही खत्म कर दिया। जानकारी के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप शनिवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) व्हाइट हाउस लौट आए। ट्रंप ने रात कैंप डेविड में बिताने के बाद अपना कार्यक्रम बदलकर काम पर लौटने का फैसला किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं और मांगें नहीं माने जाने पर 'निर्णायक युद्ध' के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।
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ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव प्रमुख मोहसिन रेजाई ने अल जजीरा से कहा, "हम मध्यस्थ कतर के संपर्क में हैं। कतर ने युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से हमारी शर्तें वॉशिंगटन तक पहुंचा दी हैं। हम राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हमारी शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, हमारी जब्त की गई धनराशि को जारी करना और नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल है। इन शर्तों को स्वीकार करना वॉशिंगटन के हित में है। ट्रंप की धमकियों से कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।"

प. एशिया में बढ़ी अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा, नागरिकों को चेतावनी जारी
इसके बाद पश्चिम एशिया में अमेरिकी राजनयिक मिशनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। अमेरिका ने इराक, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अपने नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है। 
  • अमेरिका की ओर से जारी चेतावनी में कहा गया कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इस सैन्य संघर्ष के तेजी से बढ़ने की आशंका है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और विमान सेवाओं से जुड़ी सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
  • चेतावनी में कहा गया कि मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान और उसके समर्थन वाले समूह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका के हितों या अमेरिकी लोगों और संस्थानों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इनमें अमेरिकी कंपनियां और अन्य संस्थान भी शामिल हैं।
क्या अमेरिका ने कर ली ईरान पर हमले की तैयारी? 
इस बीच रूस टुडे ने खबर दी कि ब्रिटेन के एक हवाई अड्डे से अमेरिकी बमवर्षक विमान पश्चिम एशिया की ओर रवाना हुआ है। ईरान के प्रेस टीवी के अनुसार, उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-हसाका में खरब अल-जिर सैन्य अड्डे के पास वायु रक्षा गतिविधियां देखी गई हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव उस समय और बढ़ गया जब सऊदी अरब ने कहा कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए रियाद पर हमला करने की कोशिश की। सऊदी सेना ने दावा किया कि मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। हूती समूह ने कहा कि उसने 'संवेदनशील ठिकानों' को निशाना बनाया, लेकिन इन ठिकानों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।

क्या हूती लड़ाकों का खात्मा कर सकता है सऊदी अरब?
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा, "अगर हमें यमन के निर्दोष लोगों की चिंता नहीं होती तो हमने एक सप्ताह में उस पर कब्जा कर लिया होता और हूती विद्रोहियों का सफाया कर दिया होता।" यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दुनिया के विभिन्न देशों के नेता न्यूयॉर्क में जुटने वाले हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया का संघर्ष उनकी बैठकों और चर्चाओं का प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले कह चुके हैं कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। इसी के साथ वह तेहरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार कर रहे थे। दुनिया की नजरें अब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
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