ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल ने फोन पर बातचीत की। दोनों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और जारी संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर चर्चा की।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब अमेरिका अपने सैन्य अभियान बंद करे। उन्होंने अमेरिका की ओर से ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नाकाबंदी का भी जिक्र किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इसके कारण होने वाले सुरक्षा और आर्थिक नुकसान के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने अराघची से क्षेत्रीय पड़ोसी देशों और अमेरिका के साथ बातचीत में रचनात्मक तरीके से शामिल होने की अपील की, ताकि संघर्ष को खत्म करने में मदद मिल सके। वाडेफुल ने आगे जोर देकर कहा कि समुद्री मार्ग से सभी जहाजों के लिए आने-जाने की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के खोल दिया जाना चाहिए।
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इससे पहले रविवार को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति संबंधी संसदीय समिति ने एक रणनीतिक पहल की व्यापक रूपरेखा को मंजूरी दी थी। इस पहल का मकसद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में क्षेत्रीय सुरक्षा और टिकाऊ विकास को मजबूत करना है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ‘पूरी तरह स्वस्थ’: राष्ट्रपति पेजेशकियन
उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया कि देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई 'पूरी तरह स्वस्थ' हैं। उन्होंने उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज किया।
ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि जो व्यक्ति सात से आठ घंटे तक बैठकर चर्चा कर सकता है, उसे स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी बताया कि खामेनेई के साथ उनकी 'बहुत अच्छी' बैठक हुई थी।
यह उच्च स्तर की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर लगातार खबरें और दावे सामने आ रहे थे। इससे पहले रविवार को ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज एजेंसी ने एक बिना तारीख वाला वीडियो जारी किया था। इसमें मोजतबा खामेनेई को अच्छी सेहत में दिखाई दिए थे।
सर्वोच्च नेता खामेनेई ने सेना में छह अहम पदों पर नियुक्तियां कीं
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सेना के जनरल स्टाफ, इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स में छह वरिष्ठ कमांडरों को अहम पदों पर नियुक्त किया है। यह जानकारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।
खामेनेई ने अलग-अलग आदेश जारी कर इन नियुक्तियों की घोषणा की। अली अब्दोल्लाही को सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है, जबकि कियूमर्स हैदरी को डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया है।
वहीं, अहमद वाहिदी को लेफ्टिनेंट जनरल के पद के साथ आईआरजीसी का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। मुस्तफा इजादी को आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर-इन-चीफ बनाया गया है। अली अजमाई को आईआरजीसी की नौसेना का कमांडर नियुक्त किया गया है, जबकि होसैन ताएब को बसीज रेजिस्टेंस फोर्स का प्रमुख बनाया गया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने की अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को अमेरिका की प्रतिबंध नीति की आलोचना की। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर आर्थिक प्रतिबंधों की 'लत' होने का आरोप लगाया। यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की उस कथित टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रतिबंध ईरान का 'दम घोंट' रहे हैं।
बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि बार-बार प्रतिबंधों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि अमेरिका कूटनीति के जरिये आगे बढ़ने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा, अमेरिकी वित्त मंत्री ने आर्थिक प्रतिबंधों के जरिये ईरान का 'दम घोंटने' की बात पर गर्व जताया है। इस दावे में दिखने वाली बेबसी से आगे बढ़कर देखें, तो यह अमेरिका की प्रतिबंधों की मजबूरी और लत का साफ सबूत है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जब भी वाशिंगटन कूटनीति के जरिये अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहता है, तो वह प्रतिबंधों का सहारा लेता है। उन्होंने कहा कि जब प्रतिबंधों से भी नतीजे नहीं मिलते, तो अमेरिका उनकी सख्ती और बढ़ा देता है।