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US-Iran Talks: 'ट्रंप बदलें अपना व्यवहार और वार्ता के मंच पर...', ईरानी मंत्री ने अमेरिका से मांगी ये गारंटी

Fri, 11 Jul 2025 09:02 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

US-Iran Talks: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह सम्मान और सुरक्षा की गारंटी चाहता है। इसके साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों को भी अपने पुराने रवैये से पीछे हटना होगा। ईरान का कहना है कि अगर बातचीत को सफल बनाना है, तो सैन्य धमकी और प्रतिबंधों की जगह विश्वास और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देनी होगी।
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सैयद अब्बास अराघची, ईरानी विदेश मंत्री - फोटो : X @araghchi
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विस्तार
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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सम्मान और गरिमा के आधार पर बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका को पहले अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा और यह भरोसा देना होगा कि वह बातचीत के दौरान कोई सैन्य हमला नहीं करेगा।
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अमेरिका अपनी गलती माने- ईरानी विदेश मंत्री
अराघची ने फ्रांस के अखबार ले मोंडे को दिए इंटरव्यू में कहा, 'कूटनीति दो-तरफा रास्ता है। बातचीत तोड़ने और सैन्य कार्रवाई की शुरुआत अमेरिका ने की थी। इसलिए अब जरूरी है कि अमेरिका अपनी गलती माने और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य की किसी भी वार्ता के दौरान वह सैन्य हमला नहीं करेगा।' उन्होंने बताया कि कुछ मित्र देशों और मध्यस्थों की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच एक राजनयिक संपर्क माध्यम की स्थापना की जा रही है।

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ईरान को हुए नुकसान की भरपाई का अधिकार
अब्बास अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है और ईरान इस नुकसान के लिए मुआवजा मांगने का अधिकार रखता है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई देश यह दावा करता है कि उसने किसी और देश की ऊर्जा, चिकित्सा, कृषि और विकास संबंधी शांतिपूर्ण परमाणु परियोजनाएं नष्ट कर दी हैं, तो यह एक गंभीर भूल है'।

IAEA की निगरानी में चल रहा है ईरान का परमाणु कार्यक्रम
अब्बास अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में है और उसमें किसी तरह की हथियार संबंधी गतिविधि नहीं पाई गई है। उन्होंने कहा- 'यह सिर्फ इमारतें नहीं हैं, यह एक पूरे राष्ट्र की वैज्ञानिक क्षमता और इच्छा है। आईएईए की रिपोर्टों में यह साफ कहा गया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम में हथियार निर्माण की कोई दिशा नहीं देखी गई'। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या यूरोपीय देश और पाबंदियां या सैन्य धमकी देते हैं, तो इससे कूटनीतिक प्रयासों को गहरा नुकसान पहुंचेगा।
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यूरोपीय देशों को भी चेतावनी
तीन यूरोपीय देशों की ओर से 2015 के परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों की प्रक्रिया फिर से शुरू करने के सुझाव पर अराघची ने कहा कि ऐसा कदम लेना ईरान के खिलाफ सैन्य हमला करने जैसा होगा और इससे यूरोप की भूमिका भी खत्म हो जाएगी। बता दें कि, 13 जून को इस्राइल ने ईरान पर हमला किया और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की। 22 जून को अमेरिका ने भी ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उल्लंघन है। 24 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल की ओर से एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की।

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