Ceasefire: अमेरिका में रहने वाले दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिका को दो वजहों से भारत-पाकिस्तान के बीच में दखल देना पड़ा। एक वजह दोनों देशों के बीच तनाव था और दूसरी वजह भारत का रावलपिंडी में एयरबेस को निशाना बनाना था, जिसके पास परमाणु ठिकाने है।
भारत और पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर रविवार को वॉशिंगटन डीसी स्थिति दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, (दोनों देशों में) पिछले कुछ ही दिनों में तनाव बहुत तेजी बढ़ा और फिर अचानक एक युद्ध विराम हो गया, जो बिल्कुल अप्रत्याशित था। यह वाकई चौंकाने वाला है।
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उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि भारत-पाकिस्तान संबंध पिछले दशक में सबसे निचले स्तर पर थे और कारगिल युद्ध के किसी भी समय की तुलना में युद्ध के काफी करीब थे। इस लिहाज से यह संघर्ष विराम तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन मुझे लगता है कि यह संघर्ष विराम बहुत ही नाजुक है, क्योंकि हम जानते हैं कि दोनों देशों के बीच अब भी बहुत ज्यादा तनाव है।
कुगेलमैन ने दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, हमने अमेरिका की ओर से निरंतर यह रुख देखा कि वह तनाव कम करने की अपील कर रहा था। संकट के शुरुआत में अमेरिका की कोई सक्रिय मध्यस्थता नहीं थी, लेकिन अमेरिका की स्थिति शुरू से ही यही थी कि तनाव को कम किया जाए।
उन्होंने आगे कहा, हालांकि, उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और राष्ट्रपति ट्रंप ने यह संकेत दिया था कि अमेरिका केवल स्थिति की निगरानी करेगा। फिर भी अमेरिका ने अचानक जिस तरह से इस युद्ध विराम के आगे बढ़कर दखल दिया, उसकी दो वजह हैं। पहली वजह तेजी से तनाव बढ़ना है। यह संकट बहुत तेजी से बढ़ा था और दोनों पक्षों ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की थी। दूसरी वजह परमाणु हथियारों से जुड़ी चिंता है। मेरा मानना है कि जब भारत ने रावलपिंडी के एक एयरबेस को निशाना बनाया तब अमेरिका को बहुत चिंता हुई, क्योंकि यह परमाणु ठिकाने के पास है।