यही नहीं भारत में यह संक्रमण की तरह फैल रहा है। नई दिल्ली में पिछले दिनों कराए गए एक फूड सर्वे में पाया गया कि 80 फीसदी सुपरबग्स भोजन के रास्ते शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। वहीं 40 फीसदी खाद्य सामग्री ऐसी थी, जिसमें भारी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया गया था।
दूसरी ओर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हैदराबाद के नजदीक मेडक में काजीपल्ली झील में सबसे ज्यादा सुपरबग्स पैदा करने वाली बताया गया है। इस इलाके में करीब 300 से ज्यादा दवा कंपनियां हैं, जिनका गंदा पानी इस झील में जाता है। यही वजह है कि यहां एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया तेजी से पनप रहे हैं।
तेजी से फैल रहे इस सुपरबग पर संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन चिंतित है। यूएन सहित कई सदस्य देशों ने भारत से अपील की है कि वह मेडक पनप रहे बग पर काबू करने के लिए एहतियातन कदम उठाए। बताया गया है कि 13 दवा कंपनियों ने बग के सफाए के लिए सफाई करने का ऐलान किया है। लेकिन इस पूरे मामले को संजीदगी से लेने की जरूरत है।
समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि तेजी और पूरी गंभीरता से कदम उठाने होंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक स्वीडन की गोथेनबुर्ग यूनिवर्सिटी के शोध में पता चला कि काजीपल्ली झील और उसके आसपास दवा कंपनियों के कचरे की मात्रा बहुत ज्यादा है।
क्या होता है सुपरबग
सुपरबग उस बैक्टीरिया को कहते हैं जिन पर किसी भी एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है। यही वजह है कि इसे कई बार एड्स या एचआईवी से भी बड़ा खतरा माना जाता है। दरअसल शरीर के हानिकारक बैक्टीरिया समय के साथ धीरे-धीरे दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसा होने पर डॉक्टर्स के लिए दवाओं की मदद से उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। चिकित्सा जगत में ऐसे बैक्टीरिया को सुपरबग कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी विश्व में बढ़ रहे सुपरबग पर चिंता जता चुका है।
इलाज की तलाश
सुपरबग सिर्फ भारत या भारतीयों के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि यह अमेरिका जैसे देश तक के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है। मेडिकल साइंस के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है, जानकार बताते हैं कि हर एंटीबायोटिक को करीब पांच साल में अपनी बेअसरी का सामना करना पड़ता है।
मेडिकल की दुनिया से जुड़े लोगों का कहना है कि सबसे पहले एंटीबायोटिक्स की बेअसरी का पता मशहूर एंटीबायोटिक पेनिसिलिन पर पता चला था। सिर्फ तीन साल के अंदर इसे बेअसरी का सामना करना पड़ा था।
अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि देश में पहली बार ऐसा सुपरबग मिला है जिस पर सभी एंटीबायोटिक्स बेअसर हैं। यही नहीं विश्व वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी थॉमस फ्रेडेन का कहना है कि वह दिन दूर नहीं जब एंटीबायोटिक पूरी तरह से दुनिया से खत्म हो जाएंगे।
बैक्टीरिया से बचने के लिए यह जरूरी
सुपरबग के खिलाफ दुनियाभर में वैज्ञानिक हर दिन शोध में जुटे हैं और वह रोज नई सूचनाओं के साथ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अब कुछ बातों को ध्यान में रखकर हम खुद को इस खतरनाक बैक्टीरिया की चपेट में आने से बचा सकते हैं।
हैंड वाश : सुपरबग से बचाव का सबसे अच्छा और सस्ता उपाय साफ-सफाई है। इसलिए समय-समय पर हाथ धोते रहें। खासकर खाना खाने, टॉयलेट करने या फिर किसी गंदे गेट आदि को छूने के बाद साबुन से हाथ जरूर धो लें।
इम्यूनिटी : हमेशा पौष्टिक खाना खाएं, भरपूर नींद लें, नियमित व्यायाम करें। इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत रहेगा। बच्चे का समय पर वैक्सीनेशन करवाएं, जिससे उसका प्रतिरोधी तंत्र बेहतर होगा। यही नहीं इम्यून सिस्टम से आप ऐसे बैक्टीरिया से लड़ने के लिए मजबूत होंगे।
एंटीबायोटिक्स : एंटीबायोटिक ही एक ऐसी दवा है जो बैक्टीरिया के संक्रमण को खत्म करती है, लेकिन अगर आप इसका ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो इसका असर धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा।
यातायात के दौरान बरतें सावधानी : सुपरबग आमतौर पर पानी और खाने के माध्यम से अधिक संपर्क में आते हैं। ऐसे में ध्यान रखें कि यदि आप ऐसे शहर या देश जा रहे हैं जहां इसका खतरा है तो इसकी सावधानी ही समझदारी है।
अस्पताल : भारत जैसे विकासशील देशों में तो सुपरबग का खतरा अधिक है। यहां अस्पताल में भी संक्रमण बहुते तेजी से फैलता है और इसका खतरा भी अधिक होता है।
ध्यान रखें:
हमेशा डॉक्टरी सलाह के बाद ही एंटीबायोटिक लें। किसी भी दवा का कोर्स हमेशा पूरा करें। उसे बीच में बंद न करें। डॉक्टर्स के पुराने पर्चे के हिसाब से दवा लेकर खुद इलाज न करें। डॉक्टर्स बीमारी के हिसाब से सही एंटीबायोटिक लेने की सलाह दें। जब मरीज को बहुत ज्यादा जरूरत हो तभी एंटीबायोटिक लिखें। इंफेक्शन को रोकने का हरसंभव प्रयास करें।