श्रीलंका में संसदीय चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है। जानकारी के अनुसार सुबह सात से शुरू हुई मतदान प्रक्रिया शाम चार बजे तक चली। निगरानी समूहों के मुताबिक, इस बार मतदाताओं की मौजूदगी सितंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव के 79 फीसदी से कम रही। दोपहर 12 बजे तक अधिकांश जिलों में 50 फीसदी से कम मतदान हुआ था।
श्रीलंका में संसदीय चुनावों के लिए बृहस्पतिवार को मतदान शांतिपूवर्क संपन्न हो गया। स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे मतदान समाप्त हुआ। यह चुनाव राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतृत्व वाली नेशनल पीपल्स पावर (एनपीपी) पार्टी की अहम परीक्षा है। वहीं, दिसानायके ने चुनावों में बहुमत मिलने का भरोसा जताया है।
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कई जिलों में धीमी रही मतदान की गति
निगरानी समूहों के मुताबिक, इस बार मतदाताओं की मौजूदगी सितंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव के 79 फीसदी से कम रही। दोपहर 12 बजे तक अधिकांश जिलों में 50 फीसदी से कम मतदान हुआ था। चुनाव आयोग ने कुल मतदान के लगभग 65 फीसदी रहने का अनुमान लगाया। सुबह 7 बजे से 13,314 से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान शुरू हुआ।
शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ मतदान
2.1 करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका में 1.7 करोड़ से अधिक नागरिक पांच साल के कार्यकाल के लिए 225 सदस्यीय संसद के चुनाव के लिए मतदान के योग्य थे। लगभग 90,000 पुलिस और सेना के कर्मियों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। कुछ मामूली गलत प्रचार की घटनाओं को छोड़कर हिंसा की कोई खबर नहीं आई और चुनाव कुल मिलाकर शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
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8,800 उम्मीदवारों की किस्मत का होगा फैसला
इस चुनाव में 1.71 करोड़ मतदाता 8,800 उम्मीदवारों में से अपनी पसंद चुना है, इसके नतीजे शुक्रवार को घोषित किए जा सकते हैं। वहीं पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, गोटबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे जैसे दिग्गज नेताओं ने चुनावी मुकाबले से बाहर रहने का फैसला किया है।
राष्ट्रपति दिसानायके को मजबूत बहुमत की उम्मीद
चुनाव पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि सत्तारूढ़ एनपीपी को 113 सीटों का साधारण बहुमत मिलेगा। वहीं, कोलंबो में मतदान करने के बाद दिसानायके ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी बहुमत हासिल करेगी, हालांकि उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत जरूरी नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि उनकी सरकार के प्रस्तावित कानून आम नागरिकों के हित में होंगे और उन्हें संसद में व्यापक समर्थन मिलेगा। दिसानायके ने श्रीलंका को एकजुट करने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य तमिल बहुल उत्तरी क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों के लोगों का भरोसा जीतना है।