यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को दूसरे यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत का प्रस्ताव रखा। जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने विचार से अवगत कराया और कहा कि शांति शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत में की जा सकती है। हालांकि, इसके साथ ही जेलेंस्की ने कहा कि ऐसे देश में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना संभव नहीं होगा, जो पिछले शांति शिखर सम्मेलन की विज्ञप्ति में शामिल नहीं हुआ है।
उद्घाटन शांति शिखर सम्मेलन जून में स्विट्जरलैंड में ल्यूसर्न के पास एक रिसॉर्ट में आयोजित किया गया था, जिसमें 90 से अधिक देशों और वैश्विक संस्थानों ने भाग लिया था, जिसका एकमात्र ध्यान यूक्रेन में शांति लाने पर था। इसमें भारत ने भी भाग लिया था, लेकिन विचार-विमर्श से निकली विज्ञप्ति से खुद को जोड़ने से परहेज किया।
एक मीडिया ब्रीफिंग में, जेलेंस्की ने कहा, 'जहां तक शांति शिखर सम्मेलन की बात है, मेरा मानना है कि दूसरा शांति शिखर सम्मेलन होना ही चाहिए। यह अच्छा होगा यदि इसे वैश्विक दक्षिण देशों में से किसी एक में आयोजित किया जा सके।' उन्होंने कहा, हम वर्तमान में इसके लिए सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से बात कर रहे हैं।
जेलेंस्की ने कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि हम भारत में वैश्विक शांति शिखर सम्मेलन आयोजित कर सकते हैं। यह एक बड़ा देश है और सबसे बड़ा महान लोकतंत्र है।
इससे पहले, पीएम मोदी ने शुक्रवार को जेलेंस्की से बात की और कहा कि यूक्रेन-रूस दोनों को चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए समय बर्बाद किए बिना एक साथ बैठना चाहिए। भारत क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मोदी ने कहा, 'मैं शांति का संदेश लेकर आया हूं। मैं आपको और पूरे वैश्विक समुदाय को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत (राज्यों की) संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है और यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'
वहीं, जेलेंस्की ने कहा कि भारत यूक्रेन की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया में सभी को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का समान रूप से सम्मान करना चाहिए।