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बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन: पुलिस की गाड़ियों में लगाई आग, हजारों गारमेंट कर्मचारी क्यों उतरे सड़क पर?

सार

बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गारमेंट मजदूरों का प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगाई और सड़कें जाम कीं। पुलिस से झड़प में कई लोग घायल हुए। हालात बिगड़ने पर 670 फैक्ट्रियां बंद करनी पड़ीं और अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात किए गए।
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ढाका में कपड़ा मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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बांग्लादेश में गारमेंट कर्मचारी अपनी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन करते रहे। वाहनों में तोड़फोड़ और मुख्य सड़कों को जाम किए जाने की खबरें सामने आने के बाद, अधिकारियों को अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।
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प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प
स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार, राजधानी के मीरपुर इलाके, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी, जबकि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछारों और लाठियों का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन की वजह से कितने फैक्ट्रियों बंद हुए?
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों की ताजा लहर के कारण ढाका, गाजीपुर और मध्य मेमनसिंह में लगभग 4,000 पंजीकृत गारमेंट फैक्ट्रियों में से 670 को बंद करना पड़ा है।
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मजदूरों की क्या मांग है? 
मजदूरों की मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन को मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 बांग्लादेशी टका (लगभग 242 अमेरिकी डॉलर) कर दिया जाए। बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग में 40 लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं। यह निर्यात से होने वाली कमाई का एक बड़ा स्रोत है।

बीजीएमईए के अनुसार, चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है, और 2025-26 के वित्तीय वर्ष में यहां से 38.70 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कपड़ों का निर्यात हुआ है। बांग्लादेश के गारमेंट उत्पादों का निर्यात 150 से अधिक देशों में किया जाता है, जिनमें यूरोप और अमेरिका प्रमुख बाजार हैं।

क्यों तेज हुआ प्रदर्शन? 
सरकार की ओर से रविवार को एक 'वेज बोर्ड' (वेतन बोर्ड) के गठन की घोषणा के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी रहे। इस बोर्ड की अध्यक्षता वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेख अशफाकुर रहमान कर रहे हैं, और इसका काम मौजूदा वेतन ढांचे की समीक्षा करना तथा उसमें बदलाव की सिफारिश करना है।

अवामी लीग पर क्या लगे आरोप? 
सोमवार को गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी (जिसे अब भंग कर दिया गया है) से जुड़े कुछ गारमेंट फैक्ट्री मालिक भी इस अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं।

इस बीच, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के श्रम और रोजगार सलाहकार महदी अमीन ने दावा किया कि सरकार को मजदूर आंदोलन में भगोड़ी बुरी ताकतों के घुसपैठ करने के सबूत मिले हैं। जो संभवत अवामी लीग की ओर इशारा है। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निर्यातकों ने भी चिंता जताई है कि चल रहे हंगामे के कारण पश्चिमी खरीदारों के ऑर्डर रद्द हो सकते हैं। जिले के औद्योगिक पुलिस अधीक्षक अमजद हुसैन ने पत्रकारों को बताया कि सोमवार को अकेले गाजीपुर में ही हंगामे के चलते 150 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद हो गईं। यह इलाका सबसे बुरी तरह प्रभावित औद्योगिक क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है। गाजीपुर के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद नूरुल करीम भुइयां ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 10 प्लाटून तैनात की गई हैं।

कई वाहनों में लगा दी आग
'प्रोथोम आलो' सहित कई अखबारों ने खबर दी है कि प्रदर्शनकारियों ने ढाका-तंगेल राजमार्ग को जाम कर दिया, जो गाजीपुर के औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। उन्होंने पुलिस की तीन वैन और कई अन्य वाहनों में आग लगा दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन झड़पों में बीजीबी के कम से कम दो जवान और पत्रकारों सहित कई अन्य लोग घायल हो गए।
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