कर्फ्यू पूरी तरह से हटने के बाद काठमांडो पुरानी रंगत में नजर आने लगा
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नाराजगी तो थी ही, नेपो किड्स ने भी उकसाया
जेन-जी के कई युवाओं का कहना था कि भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ गुस्सा तो पहले से ही था, लेकिन नेपो किड्स ने भी उकसाने का काम किया। जब लोग नेपो किड्स की सोशल मीडिया पर दिखाई गई शानो-शौकत पर कमेंट करते, तो उनमें से भी कई जवाबी कमेंट किया करते थे। एक नेपो किड का नाम तो नहीं लिया गया, लेकिन बताया गया कि उसने लिखा कि जब उनके जेन-जी के माता-पिता कमा नहीं सकते, तो दूसरों से क्यों चिढ़ा जाए। हालांकि जेन-जी का कहना है कि उनके पास लंबी वजहें थीं, सामने भी आईं लेकिन अब आगे की बात करनी है।
जेन-जी की ताकत ठीक से नहीं समझ सकी सरकार
नेपाल के योजना आयोग की सदस्य डॉ रीना यादव का कहना है कि सरकार को इसे सामान्य आंदोलन नहीं समझना चाहिए था। पिछले दिनों गन्ना किसानों और शिक्षकों का आंदोलन हुआ था। दोनों आंदोलनों में अंतर था। इसे गृहमंत्री को खुद देखना चाहिए था। बेहतर है कि संविधान बच गया है। अब नई सरकार पर जिम्मेदारी है कि देश को आगे ले जाएं। भ्रष्टाचार और नेपो किड्स के जो मुद्दे जेन- जी ने उठाए थे, उनकी जांच अब की जानी चाहिए।
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नेपाल में तो रोजगार की बात ही नहीं होती
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कार्की से बड़ी उम्मीदें
यह तस्वीर शुक्रवार देर रात की है। सुशीला कार्की जब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, तो जेन-जी के नेता सुदन गुरुंग ने उनका स्वागत कुछ इस तरह किया, मानो कह रहे हों कि नेपाल के नवनिर्माण की जिम्मेदारी अब आप पर ही है।
तबाही के निशान देखने संसद भवन के बाहर जुट रहे लोग
जले हुए संसद भवन के बाहर शनिवार को भी युवाओं की भीड़ उमड़ी। सभी जले हुए अवशेष देखने आ रहे हैं। एक बुजुर्ग अर्जुन ने गुस्से से कहा कि यह इमारत एक तरह से भ्रष्ट नेताओं के जमावड़े की गवाह बन गई थी। उनके बच्चों ने वह कर दिखाया, जो वह नहीं कर सके। जब उनसे पूछा गया कि वह क्या करते हैं, तो कहा कि कुछ नहीं। नेपाल में रोजगार पर बात ही कहां की गई।