पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस क्षेत्र में बढ़ी हिंसा के लिए सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान जिम्मेदार नहीं है, बल्कि समर्पण कर चुके तालिबान दहशतगर्द भी दोषी हैं, जिनकी पीठ पर पाकिस्तान सरकार का हाथ है। ये दोनों ही गुट यहां नागरिकों की हत्या, लूट-खसोट, और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल हैं।
पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान और उसके आसपास के उत्तरी वजीरिस्तान के जिलों में हाल में हिंसा काफी बढ़ोतरी हुई है। यही इलाका तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (जिसे बोलचाल में पाकिस्तानी तालिबान कहा जाता है) की जन्म स्थली है। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से इस इलाके में पाकिस्तानी तालिबान की गतिविधियां बढ़ गई हैँ। इससे यहां के बाशिंदों में फिर से पुराने दिनों जैसी दहशत लौटने का अंदेशा गहरा गया है।
विज्ञापन
पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस क्षेत्र में बढ़ी हिंसा के लिए सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान जिम्मेदार नहीं है, बल्कि समर्पण कर चुके तालिबान दहशतगर्द भी दोषी हैं, जिनकी पीठ पर पाकिस्तान सरकार का हाथ है। ये दोनों ही गुट यहां नागरिकों की हत्या, लूट-खसोट, और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल हैं। टीवी चैनल अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां हिंसा में इजाफा इस साल के आरंभ से ही होने लगा। इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक दक्षिणी और उत्तरी वजीरिस्तान के जिलों में हथियारबंद गुटों ने 37 हमले किए हैं। उनमें 69 लोगों की जान गई है। अल-जजीरा ने ये आंकड़े आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट साउथ एशिया टेररिज्म पॉर्टल के हवाले से दिए हैं।
हमलों का ज्यादा शिकार तालिबान विरोधी नागरिक बने हैं। इनके अलावा कई जगहों पर लूट-खसोट के मकसद से हमले किए गए और बम विस्फोट किए गए। बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाया गया है। इस वर्ष हिंसा में जो लोग मारे गए, उनमें 84 प्रतिशत सुरक्षाकर्मी हैं। पाकिस्तान की सेना ने बढ़ी हिंसा की वजह अफगानिस्तान में बनते हालात को बताया है। एक सुरक्षा अधिकारी ने अपना नाम ना जाहिर करने की शर्त पर अल-जजीरा से कहा- ‘अफगानिस्तान में बनी स्थिति के झटके पाकिस्तान में भी महसूस किए गए। लेकिन ये हाल थोड़े समय ही रहा, क्योंकि पाकिस्तान के सुरक्षा बल किसी भी अंदरूनी या बाहरी खतरे का मुकाबला करने के लिए चुस्त-दुरुस्त हैं।’
विज्ञापन
इस साल अक्टूबर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एलान किया था कि उनकी सरकार पाकिस्तानी तालिबान से बातचीत करेगी, ताकि शांतिपूर्ण समाधान ढूंढा जा सके। नवंबर में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुट्टाकी ने इस बात की पुष्टि की कि वे ऐसी बातचीत शुरू कराने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। बाद में खबर आई कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू हो गई है। लेकिन वजीरिस्तान में इस खबर से ज्यादा उत्साह पैदा नहीं हुआ। वहां के निवासियों का कहना है कि उन्हें शक है कि इससे कोई ठोस नतीजा हासिल होगा।
उस क्षेत्र के पर्यवेक्षकों ने अल-जजीरा से बातचीत में ध्यान दिलाया कि अतीत में जब कभी कोई समझौता हुआ है, तो पाकिस्तानी तालिबान ने उसका इस्तेमाल खुद मजबूत करने के लिए किया है। बाद में उसे जब स्थिति अपने अनुकूल लगती है, तो वह फिर हिंसा शुरू कर देता है। एक पर्यवेक्षक ने कहा- अंत में होगा यह कि पाकिस्तानी तालिबान कबीलाई इलाकों में अपने ब्रांड का शरिया कानून लागू करने की कोशिश करेगा। उस पर सरकार एतराज करेगी। और वहां से फिर बात बिगड़ जाएगी।