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Geneva: निरस्रीकरण सम्मेलन में भारत की अपील, हथियारों की नई दौड़ रोके दुनिया; वैश्विक सुरक्षा पर दें ध्यान

Wed, 25 Feb 2026 01:40 PM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

भारत ने जिनेवा में निरस्रीकरण सम्मेलन के दौरान दुनिया को हथियारों की नई रेस के प्रति आगाह किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति और सैन्य क्षेत्र में एआई पर इंसानी नियंत्रण की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारत ने वैश्विक सुरक्षा के लिए सभी देशों से एकजुट होने की अपील की है।
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विक्रम मिसरी, विदेश सचिव - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत ने दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और हथियारों की नई रेस को रोकने की जरूरत पर जोर दिया है। जिनेवा में निरस्रीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सुरक्षा का माहौल बहुत अनिश्चित है। सैन्य खर्च बढ़ रहा है और पुराने हथियार नियंत्रण समझौते कमजोर पड़ रहे हैं।
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विदेश सचिव ने 'न्यू स्टार्ट'  संधि के खत्म होने को वैश्विक हथियार नियंत्रण के लिए एक बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है। भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति संपन्न देश है। भारत अपनी परमाणु नीति के तहत भरोसेमंद न्यूनतम प्रतिरोध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 

भारत 'नो-फर्स्ट यूज' (परमाणु हथियार का पहले इस्तेमाल न करना) की नीति का पालन करता है। साथ ही, भारत उन देशों के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेगा जिनके पास ये हथियार नहीं हैं। विक्रम मिसरी ने परमाणु निरस्रीकरण के लिए एक चरणबद्ध और भेदभाव रहित तरीके की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी व्यवस्था चाहता है जिसे पूरी दुनिया माने और जिसकी सही तरीके से जांच हो सके। उन्होंने 'फिसाइल मटीरियल कट-ऑफ ट्रीटी' पर बातचीत का भी समर्थन किया।
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तकनीक के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर भी भारत ने अपना पक्ष रखा। विदेश सचिव ने कहा कि नई तकनीक से सैन्य क्षमताएं तो बढ़ रही हैं, लेकिन इससे नए खतरे भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र को इन तकनीकों के सुरक्षा पर पड़ने वाले असर की जांच करनी चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बारे में उन्होंने साफ किया कि सेना में एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से होना चाहिए। इसमें इंसानी फैसला और निगरानी बहुत जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन हो सके।

उन्होंने बताया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के लिए एक घरेलू ढांचा तैयार किया है। यह ढांचा सुरक्षा और पारदर्शिता जैसे सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने यह भी साफ किया कि परमाणु हथियारों से जुड़े फैसले पूरी तरह इंसानों के हाथ में ही रहेंगे। विदेश सचिव ने भारत में हुए 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का भी जिक्र किया। इसमें 100 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया था। इस समिट में एआई तकनीक को सभी देशों, खासकर ग्लोबल साउथ तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
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अंतरिक्ष की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि आउटर स्पेस सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए, न कि संघर्ष का। भारत अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए कानूनी नियमों का समर्थन करता है। इसके अलावा, भारत दिसंबर 2025 में बायोलॉजिकल वेपन्स कन्वेंशन की 50वीं सालगिरह पर एक सम्मेलन की मेजबानी करेगा। अंत में, उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे छोटे हितों को छोड़कर सामूहिक सुरक्षा पर ध्यान दें और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं।

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