भगोड़े व्यापारी विजय माल्या का कहना है कि यदि उसका भारत प्रत्यर्पण किया जाता है तो वह बलि का बकरा बन जाएगा। यह बातें उसने जस्टिस विलियम डेविस के उच्च न्यायालय में कहीं। अदालत ने उसके 4 फरवरी को भारत प्रत्यर्पित करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील के पक्ष में दिए तर्क को खारिज कर दिया। इससे अब शराब कारोबारी के पास कानूनी रास्ते कम हो गए हैं।
जज ने पांच पन्नों के आदेश में पांच फरवरी के आदेश के खिलाफ अपील करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। जिसमें माल्या का वह दावा भी शामिल है कि भारत ब्रिटेन के साथ प्रत्यर्पण संधि का पालन नहीं करेगा। माल्या के पास खुली अदालत में सुनवाई का आवेदन करने के लिए शुक्रवार तक का समय है। यदि वह आवेदन करता है तो उच्च न्यायालय के जज इसकी सुनवाई करेंगे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उसके पास अब कम ही विकल्प मौजूद हैं।
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस में प्रत्यर्पण के पूर्व प्रमुख निक वेमस जो ब्रिटेन की अदालती सुनवाई में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उन्होंने कहा, 'अपील करने के उसके आवेदन को लिखित रूप से खारिज करना उसके लिए वास्तविक झटका है। यदि उसका मौखिक आवेदन भी खारिज कर दिया जाता है, तो प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो जाएगा।'
वमोस ने आगे कहा, 'ऐसी परिस्थिति में माल्या को 28 दिनों के अंदर भारत लौटना होगा। हालांकि उचित कारण मौजूद होने पर उसके प्रत्यर्पण की अवधि बढ़ सकती है।' माल्या एक समय राजा की तरह जिंदगी जिया करता था। वह 2016 में भारत से भागकर ब्रिटेन चला गया था। अपने आवेदन में माल्या ने 'विशेषता' के तहत भारत के साथ संधि के मसले को उठाया है।
माल्या का कहना है कि विशेषता नियम के तहत किसी शख्स को केवल उन्हीं आरोपों के तहत प्रत्यर्पित किया जाता है जिनका जिक्र प्रत्यर्पण अनुरोध में होता है न कि दूसरे मामलो में। उसने तर्क दिया कि गृह सचिव को इस बारे में भारत से पूछताछ करनी चाहिए थी। जिसपर जस्टिस डेविस ने आदेश देते हुए कहा, 'गृह सचिव को सुझाव के अनुसार जांच करने का कोई आधार नहीं मिला। इस मामले की सच्चाई यह है कि आवेदनकर्ता का मानना है कि भारत वापस जाते ही उसे बलि का बकरा बनाया जाएगा।'