इससे पहले जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस एलिसाबेथ लेइंग की दो सदस्यीय पीठ ने सुनवाई पूरी होने की घोषणा करते हुए फैसला अन्य किसी दिन सुनाने की बात कही। पीठ ने अगले कुछ सप्ताह में फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों की तरफ से दी गई मौखिक व लिखित दलीलों पर पूरा विचार करने की बात कही।
माल्या के खुद को भारत प्रत्यर्पित नहीं करने की गुहार पर रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मंगलवार को तीन दिवसीय सुनवाई शुरू की गई थी। सुनवाई के तीसरे और निर्णायक दिन बृहस्पतिवार को बचाव और अभियोजन पक्ष के वकीलों के बीच गर्मागर्म बहस हुई। लेकिन भारत सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हो रही द क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के वकील मार्क समर्स ने अपने तर्कों के दौरान अकाट्य सबूतों के जरिये किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व बॉस की बेईमानी को साबित किया।
माल्या के बैरिस्टर क्लेयर मोंटगोमेरी ने किंगफिशर एयरलाइंस के फेल हो जाने के लिए भारत सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने जेट एयरवेज के बंद होने का भी उदाहरण दिया। लेकिन वकील समर्स ने तर्क दिया कि प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार माल्या को भारत को सौंपने के लिए 32,000 पेज के सुबूत पेश किए गए हैं। जो सारी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। बता दें कि 64 वर्षीय माल्या पर बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर हजम करने का आरोप है। वह विभिन्न भारतीय जांच एजेंसियों की तरफ से मनी लॉन्ड्रिंग और धोखेबाजी के मामलों में वांछित है।
माल्या अप्रैल, 2017 में प्रत्यर्पण वारंट के कारण गिरफ्तारी के बाद 6.5 लाख पाउंड के बांड पर जमानत हासिल करने के बाद से ही बाहर है। उसे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान हाजिर रहने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन वह अपील पर मंगलवार को चालू हुई तीन दिवसीय सुनवाई के दौरान अदालती प्रक्रिया को देखने के लिए हाजिर रहा था।
एक साल चली थी निचली अदालत में सुनवाई
लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट की जज आर्बुथनॉट ने करीब एक साल लंबी सुनवाई के बाद दिसंबर, 2018 में माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रथम दृष्टया मामला होने के स्पष्ट सबूत स्वीकार किए थे।
पिछले साल फरवरी में दी थी प्रत्यर्पण को चुनौती
पिछले साल फरवरी में तत्कालीन ब्रिटिश गृह सचिव साजिद जाविद द्वारा अपने प्रत्यर्पण आदेश को मंजूर किए जाने के खिलाफ माल्या ने इसके खिलाफ अपील करने की इजाजत हासिल की थी। माल्या ने भारत सरकार की इस दलील को चुनौती दी थी कि बैंक कर्ज लेने में धोखाधड़ी के इरादे के लिए उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।