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Philippines: उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते पर चलेगा महाभियोग; संसद में प्रस्ताव पास, जानें क्या है पूरा मामला

Mon, 11 May 2026 03:22 PM IST
रिया दुबे वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

फिलीपींस की उपराष्ट्रपति के खिलाफ प्रतिनिधि सभा ने भारी बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया। उन पर अकूत संपत्ति, सरकारी धन के दुरुपयोग और राष्ट्रपति की हत्या की धमकी देने के आरोप हैं। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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फिलीपींस की उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते - फोटो : ANI
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विस्तार
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फिलीपींस की उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के खिलाफ सोमवार को देश की प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने भारी बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया। उन पर अकूत संपत्ति रखने, सरकारी धन के दुरुपयोग और राष्ट्रपति की हत्या की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस के सहयोगियों के प्रभाव वाले निचले सदन में महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में 255 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 26 सांसद विरोध में रहे। वहीं नौ सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

किन आरोपों में घिरी हैं सारा दुतेर्ते?

सारा दुतेर्ते पर आरोप है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय के गोपनीय फंड का गलत इस्तेमाल किया। उन पर सरकारी धन के हिसाब-किताब में पारदर्शिता नहीं रखने और बड़ी मात्रा में संदिग्ध संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी लगे हैं।

इसके अलावा सबसे गंभीर आरोप राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर और उनके परिवार को धमकी देने का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सारा दुतेर्ते ने पिछले वर्ष एक बयान में कहा था कि अगर उनके खिलाफ कोई साजिश हुई तो उन्होंने किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति, प्रथम महिला और संसद अध्यक्ष की हत्या के लिए तैयार रहने को कहा है। इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया था।

शिकायतें भेजी जाएंगे सीनेट

सारा दुतेर्ते के खिलाफ दायर दो महाभियोग शिकायतें अब सीनेट को भेजी जाएंगी। सीनेट इस मामले में ट्रिब्यूनल के रूप में सुनवाई करेगी और उपराष्ट्रपति पर लगे आरोपों की जांच होगी। सारा दुतेर्ते, फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की बेटी हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से सामान्य तौर पर इनकार किया है, हालांकि आपराधिक आरोपों पर विस्तार से कोई जवाब नहीं दिया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी प्रतिनिधि सभा में उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था, लेकिन संवैधानिक तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उस समय उनके खिलाफ ट्रायल नहीं चल सका था।
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