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जानिए आखिर क्यों चावल के दाने-दाने के लिए वेनेजुएला में हो रही हत्याएं

Tue, 12 Mar 2019 02:21 PM IST
sapna singla प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली
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निकोलस मदुरो और जुआन गोइदो - फोटो : PTI
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वेनेजुएला में जारी राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति निकोलस मादुरो देश की सत्ता पर पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। वहीं विपक्ष उनकी सत्ता को उखाड़ फेंकने पर आमादा है। इससे उत्पन्न हुए गतिरोध से देश में परिस्थितियां असामान्य रूप से खराब हुई हैं। देश में मुद्रास्फीति की दर आसमान छू रही हैं। वहीं हालिया जारी ब्लैक आउट से राजधानी काराकस में 1600 जगहों पर लूटपाट की खबरें आ रही है। जानिए क्या है इस गतिरोध की पूरी कहानी-
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यह दक्षिण अमेरिकी देश आम तौर पर पेट्रोलियम के मामले में बहुत समृद्ध है। इस देश ने ह्यूगो शावेज के कार्यकाल में काफी तरक्की भी की है। लेकिन, देश में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के कारण हाल के वर्षों में 30 लाख से अधिक लोगों ने वेनेजुएला को छोड़ दिया है। बिजली कटौती, भोजन और दवा की कमी ने लोगों के विस्थापन को और ज्यादा बढ़ाया है।

आखिर राष्ट्रपति कौन?

यह अधिकांश देशों में पूछने के लिए एक असामान्य सवाल होगा लेकिन, वेनेजुएला में कई लोग 23 जनवरी 2019 की नाटकीय घटना के बाद वास्तव में यह जानना चाहते हैं। इसी दिन विधायक दल के नेता जुआन गुएडो ने खुद को वेनेजुएला का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। 
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गुएडो का यह कदम राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की शक्ति के लिए एक सीधी चुनौती थी, जिन्होंने दो सप्ताह पहले ही दूसरे छह साल के कार्यकाल के लिए शपथ ली थी।

राष्ट्रपति मादुरो ने अपने प्रतिद्वंद्वी गुएडो के इस कदम को देश के खिलाफ बताया और इसे अमेरिका द्वारा उन्हें पद से हटाने के लिए एक चाल के रूप में जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। मादुरो ने यह भी कहा कि वही संवैधानिक अध्यक्ष थे और आगे भी रहेंगे।
 

राष्ट्रपति पद विवादित क्यों है?

जुआन गुईदो
निकोलस मादुरो को पहली बार अप्रैल 2013 में अपने संरक्षक और पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की मृत्यु के बाद चुना गया था। उस समय उन्होंने मात्र 1.6 प्रतिशत वोटों के अंतर से विपक्षी प्रत्याशी पर जीत दर्ज की।

उनके पहले कार्यकाल के दौरान वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई और कई लोगों ने उन्हें और उनकी समाजवादी सरकार को इस गिरावट के लिए दोषी ठहराया। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद मादुरो को मई 2018 में विवादास्पद चुनावों में दूसरे छह साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया। इस चुनाव का अधिकांश विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था।

इस चुनाव में कई विपक्षी उम्मीदवारों को न केवल चुनाव लड़ने से रोका गया जबकि, अन्य को जेल में डाल दिया गया। इनमें से कुछ तो कैद होने के डर से देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद विपक्षी दलों ने कहा था कि मादुरो के ऐसे व्यवहार से मतदान न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष होगा।

बड़ी बात यह रही कि मादुरो के रिइलेक्शन को वेनेजुएला की विपक्षी-नियंत्रित नेशनल असेंबली ने मान्यता नहीं दी थी।
 

यह विवाद अब क्यों बढ़ रहा है?

वेनेजुएला में अपराधियों का हाल
मई 2018 के चुनावों में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुने जाने के बाद मादुरो ने घोषणा की कि वह अपने पहले कार्यकाल का शेष बचा हिस्सा पूरा करेंगे और उसके बाद ही 10 जनवरी को दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे।

मादुरो के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेते ही यह विवाद फिर से बढ़ गया। नेशनल असेंबली का तर्क है कि क्योंकि चुनाव निष्पक्ष नहीं था इसलिए मादुरो का शपथग्रहण बेकार है और देश का राष्ट्रपति पद खाली है।

अब इसे लेकर नेशनल असेंबली के नेता और विपक्ष के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले 35 वर्षीय जुआन गुएडो आंदोलन चला रहे हैं। उन्हें अमेरिका समेत कई बड़े देशों का समर्थन प्राप्त है।

वेनेजुएला के संविधान के अनुच्छेद 233 और 333 का हवाला देते हुए विधायिका का कहना है कि ऐसे मामलों में नेशनल असेंबली के प्रमुख, देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालते हैं। यही कारण है कि गुएदो ने 23 जनवरी को खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया।

 

विश्व की ऐसी रही प्रतिक्रिया

विरोध प्रदर्शन करते लोग - फोटो : PTI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जुआन गुएदो को आधिकारिक तौर पर वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी। क्योंकि, बाद में उन्होंने कहा था कि वह कार्यकारी शक्तियों को संभालेंगे।

आगे क्या?

जुआन गुएदो ने देश के आम नागरिकों से राष्ट्रपति मादुरो और उनकी सरकार के सभी लोगों से वेनेजुएला के आजाद होने तक विरोध जारी रखने का आह्वान किया है।
गुएदो को अमेरिका के साथ कई लैटिन अमेरिकी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं का समर्थन प्राप्त है लेकिन, उसके पास व्यावहारिक रूप से अधिक शक्ति नहीं है।

वह नेशनल असेंबली के अध्यक्ष हैं, लेकिन इस विधायी निकाय को 2017 में राष्ट्रीय संविधान सभा के निर्माण ने काफी हद तक शक्तिहीन बना दिया गया था। राष्ट्रीय संविधान सभा में विशेष रूप से सरकार के प्रति निष्ठावान लोग ही हैं।
 
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जानिए कौन तोड़ सकता है गतिरोध

निकोलस मदुरो - फोटो : PTI
कहा जा रहा है कि इस संकट को वेनेजुएला की सेना खत्म कर सकती है। वहां की सुरक्षा बलों को इस संकट में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सेना मादुरो के प्रति वफादार रही है। इसके फलस्वरूप मादुरो ने सेना को लगातार वेतन वृद्धि के साथ पुरस्कृत किया। प्रमुख पदों और उद्योगों के नियंत्रण में उच्च रैंकिंग वाले सैन्य अधिकारियों को रखा गया।
 
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