इसी का नतीजा था कि 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वनीता को मानव अधिकार के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी दी और उन्हें न्याय विभाग में मानव अधिकार खंड का प्रमुख बनाया। वह 2017 तक इस पद पर रहीं। नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में अमेरिका में बेहतर माहौल की हिमायत करने वाली वनीता की रहनुमाई में कई शहरों की पुलिस के कामकाज की समीक्षा और सुधारों का दौर शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने घृणा अपराधों और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में सजा, विकलांगों को बेहतर अधिकार दिलाने देने के साथ ही शिक्षा, रोजगार, आवास और मतदान में भेदभाव समाप्त करवाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।
पार्टी लाइन से ऊपर उठ की गई वनीता के लिए वोटिंग
अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद जो बाइडन ने जनवरी 2021 में वनीता को देश का सहायक अटार्नी जनरल नियुक्त किया। हालांकि, उनकी नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी थी। पिछले दिनों सीनेट ने उनकी नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी। यहां यह जान लेना दिलचस्प होगा कि सीनेट में डेमोक्रेट व रिपब्लिकन सदस्यों की संख्या 50-50 होने के बावजूद उन्हें 51 वोट मिले क्योंकि एक महिला रिपब्लकन सीनेटर ने पार्टी लाइन से हटकर वनीता को वोट दिया। हालांकि, बराबर मत पड़ने की सूरत में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अपना वोट डालने के लिए सीनेट में मौजूद थीं, लेकिन उसकी नौबत ही नहीं आई। वनीता पहली नागरिक अधिकार वकील हैं और पहली अश्वेत हैं, जो न्याय मंत्रालय के शीर्ष तीन पदों में से एक पर काबिज हुई हैं।
बाइडन बताया योग्य और सम्मानित वकील
अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें बधाई देते हुए बेहद योग्य और अति सम्मानित वकील बताया, जो देश में न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने और नस्ली भेदभाव को समाप्त करने के लिए समर्पित हैं।