कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी में स्थित सिटीजन लैब में सीनियर रिसर्चर जॉन स्कॉट- रेयलटन ने सीएनएन से कहा कि हम शपथ ग्रहण के दिन को लेकर बेहद चिंतित हैं। सिटिजेन लैब साइबर सिक्युरिटी की निगरानी करती है। उन्होंने कहा- हालांकि आम तौर पर लोग छह जनवरी को जो हुआ उससे भौंचक हैं, लेकिन कुछ धुर दक्षिणपंथी खेमों की बातचीत से लगता है कि वे इस घटना को अपनी सफलता के रूप में देख रहे हैं।
राजकाज (गवर्नेंस) पर नजर रखने वाली संस्था एडवांस डेमोक्रेसी के मुताबिक छह जनवरी की घटना के पहले सोशल मीडिया पर ट्रंप समर्थक गुटों की गतिविधि बेहद तेज हो गई थीं। क्यूनॉन संगठन से जुड़े सोशल मीडिया एकाउंट्स पर 1,480 पोस्ट किए गए, जिनमें हिंसा की बात की गई थी। कई पोस्ट्स में युद्ध शब्द का इस्तेमाल किया गया था। एक पोस्ट में कहा गया- आज से युद्ध शुरू हो रहा है।
इसके बावजूद संघीय और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इसका कोई आभास नहीं था कि कैपिटल हिल पर घेरा डाला जाएगा। डीसी पुलिस के प्रमुख रॉबर्ट कोन्टी ने घटना के एक दिन बाद कहा था कि उनके पास कोई ऐसी खुफिया जानकारी नहीं थी, जिसमें कैपिटल हिल की सुरक्षा में सेंध लगने की आशंका जताई गई हो।
शपथ के दिन सुरक्षा को लेकर सजग
अब उन्होंने दावा किया कि अब बाइडन के शपथ ग्रहण के दिन को लेकर डीसी पुलिस सतर्क है। डीसी पुलिस ने एक बयान में कहा है- अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण हमारे लोकतंत्र के बुनियादी तत्वों में एक है। 59वें शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने वाले सभी लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सुरक्षा जानकारों ने पुलिस के इस बयान पर आक्रोश और अचरज जताया है कि उसे छह जनवरी को कोई गड़बड़ी होने का अंदाजा नहीं था। जबकि सिक्युरिटी फर्म जी4एस ने चार जनवरी को ही एक विश्लेषण में यह बताया था कि छह जनवरी और शपथ ग्रहण के दिन ऐसे लोग वॉशिंगटन आएंगे, जिनका मकसद हिंसा करना है। उनमें कुछ अवैध निजी सेनाओं से जुड़े लोग भी हो सकते हैं।
जानकारों का कहना है कि 20 जनवरी को ट्रंप समर्थक उग्रवादियों के निशाने पर सिर्फ वॉशिंगटन ही नहीं होगा। बल्कि उस रोज वे पूरे देश में जहां मौका मिलेगा, गड़बड़ी फैला सकते हैं। कई सुरक्षा जानकारों का कहना है कि चुनौती जितनी गंभीर है, उसके मद्देनजर पुलिस की तैयारी अभी नजर नहीं आ रही है।