अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सैमुअल एलिटो ने मंगलवार को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की। न्यायाधीश एलिटो ने खुद इसकी जानकारी दी। हालांकि इस बातचीत पर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। खासकर निष्पक्ष न्यायपालिका के समर्थकों ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन करार दिया है। बुधवार को न्यायाधीश सैमुअल एलिटो ने बताया कि मंगलवार को उन्होंने ट्रंप को फोन किया था। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्व कानूनी क्लर्क विलियम लेवी को आगामी ट्रंप सरकार में शामिल करने की सिफारिश की थी।
एलिटो ने बताया कि दोनों के बीच अदालती मामले को लेकर नहीं हुई बात
गौरतलब है कि दोनों की फोन पर बात ऐसे वक्त हुई, जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने न्यूयॉर्क में पोर्न स्टार को पैसे देने के मामले में सजा के एलान में देरी करने की अपील उच्च न्यायालय में दायर की है। सैमुअल एलिटो ने बताया कि दोनों के बीच इस मामले को लेकर या फिर किसी अन्य कानूनी मामले को लेकर कोई बात नहीं हुई। एलिटो ने कहा कि उन्हें ट्रंप के अपील दायर करने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन दोनों के बीच कानूनी मामलों को लेकर कोई बात भी नहीं हुई। अमेरिका में न्यायाधीशों द्वारा अपने पूर्व कानूनी क्लर्क को सरकार में या फिर किसी लॉ फर्म में शीर्ष पद की सिफारिश पहले भी की जाती रही है, लेकिन किसी जज का सीधे राष्ट्रपति को कॉल करना सामान्य नहीं है और यही वजह है कि इस पर सवाल उठ रहे हैं।
निष्पक्ष न्यायपालिका समर्थकों ने बताया प्रोटोकॉल का उल्लंघन
निष्पक्ष न्यायपालिका के समर्थक समूह फिक्स द कोर्ट की कार्यकारी निदेशक गेब रोथ ने कहा कि न्यायाधीश का नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को फोन करना पूरी तरह से प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को, फिर चाहे वो कोई भी हो, अदालत के बाहर उस न्यायाधीश से संपर्क नहीं करना चाहिए, जो उनके मामले पर सुनवाई कर रहा हो। डोनाल्ड ट्रंप के प्रवक्ताओं ने इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक ट्रंप समर्थक रूढिवादी समूह के अध्यक्ष कैरी सेवेरिनो ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोनों के बीच सिर्फ सिफारिश को लेकर बात हुई थी और कुछ नहीं।
पूर्व में भी विवाद में आ चुके हैं सैमुअल एलिटो
उल्लेखनीय है कि पोर्न स्टार को पैसे देने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप को दोषी ठहराया गया है और अब उन्हें सजा का एलान होना है। ट्रंप के अटॉर्नी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सजा का एलान टालने की मांग की है क्योंकि इससे सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया बाधित हो सकती है और यह उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेश का भी उल्लंघन होगा, जिसमें पूर्व राष्ट्रपतियों को इम्युनिटी दी हुई है। सैमुअल एलिटो पूर्व में भी ट्रंप के खिलाफ दो बड़े मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। दरअसल कैपिटल हिल दंगे मामले में खुलासा हुआ था कि ट्रंप समर्थकों ने जो झंडे ले रखे थे, वैसे झंडे सैमुअल एलिटो के घर के बाहर भी फहराते देखे गए थे। इसे लेकर खूब विवाद हुआ था।
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