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क्या अब सुधार की राह पर जाएंगे अमेरिका और चीन के रिश्ते?

Tue, 02 Feb 2021 03:21 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन
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जो बाइडन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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जो बाइडन प्रशासन की तरफ से हाल ही में मिले कुछ संकेतों से उत्साहित चीन ने अमेरिका को दोस्ती का नया संदेश दिया है। चीन के वरिष्ठ राजनयिक यांग जिशी ने नेशनल कमेटी ऑन यूएस- चाइना रिलेशन्स को संबोधित करते हुए कहा कि चीन अमेरिका के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि टकराव छोड़ कर परस्पर सम्मान और दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाने वाले सहयोग के आधार पर ऐसा किया जा सकता है। इसके पहले बीते हफ्ते जो बाइडन प्रशासन ने कहा था कि वह अमेरिका और चीन के बीच हुए व्यापार समझौते के पहले चरण की समीक्षा करेगा। हालांकि आम समझ यही है कि चीन ने इस समझौते की सभी शर्तों का पालन नहीं किया, इसके बावजूद माना जा रहा है कि बाइडन प्रशासन व्यापार युद्ध के मामले में डॉनल्ड ट्रंप के दौर की नीति को बदल सकता है। 

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यांग जिशी ने मंगलवार को कहा- हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका का नया प्रशासन दोनों देशों की जनता की इच्छा के मुताबिक कदम उठाएगा और इतिहास की धारा का अनुपालन करेगा। सहयोग और मतभेदों को मिलकर संभालने पर ध्यान देते हुए दोनों पक्ष अपने संबंध को मजबूत और स्थिर विकास के रास्ते पर लौटा सकते हैं। यांग ने इसके लिए कई सुझाव दिए। इनमें सामान्य संपर्क बहाल करना, मतभेदों को सही ढंग से संभालना, और द्विपक्षीय लाभ के लिए सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। अब विश्लेषकों की नजर इस पर अमेरिकी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

इस बीच पिछले हफ्ते जब बाइडन प्रशासन ने अमेरिका- चीन व्यापार समझौते के प्रथम चरण की समीक्षा की बात की, तो दोनों देशों के व्यापार युद्ध के हुए परिणाम पर एक बार फिर लोगों का ध्यान गया। थिंक टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनामिक्स के विशेषज्ञ चैड बॉउन ने पिछले हफ्ते वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा था कि चीन ने व्यापार समझौते के तहत अपनी 42 फीसदी वचनबद्धताओं को पूरा नहीं किया। इस समझौते के पहले चरण के पीछे तत्कालीन ट्रंप प्रशासन का मकसद अमेरिका के किसानों, कारखानों और अन्य कारोबारियों को लाभ पहुंचाना था।
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ये समझौता पिछले साल जनवरी में हुआ था। लेकिन उसके बाद कोरोना महामारी आ गई। तभी ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ जोरदार अभियान छेड़ दिया। इसके तहत व्यापार युद्ध को भी तेज कर दिया गया। व्यापार युद्ध के तहत चीन से होने वाले आयात पर औसतन 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इसका मकसद अमेरिकी बाजार तक पहुंच रोक कर चीन को झुकाना था।

लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका- चीन व्यापार परिषद की तरफ से हाल में कराए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि चीन के साथ व्यापार से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही नुकसान हुआ। यह अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में विफल रहा। परिषद के अध्ययन के मुताबिक व्यापार युद्ध के कारण अमेरिका का आर्थिक विकास घटा और इस कारण वहां दो लाख 45 हजार नौकरियां गईं। दूसरी तरफ अमेरिका के साथ व्यापार में चीन का मुनाफा 317 डॉलर तक पहुंच गया। यह 2019 की तुलना में सात फीसदी ज्यादा था। वैसे वैश्विक स्तर पर 2020 में चीन का व्यापार मुनाफा 535 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह 2019 की तुलना में 27 फीसदी ज्यादा था।

इसलिए बाइडन प्रशासन का व्यापार समझौते के प्रथम चरण की समीक्षा करने के फैसले को लेकर विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि नया प्रशासन इसके बाद चीन के साथ कुल व्यापार संबंध पर फिर से गौर करने के लिए प्रेरित हो सकता है। उसमें व्यापार युद्ध छोड़ने के लिए उसके पास कोई और तार्किक विकल्प नहीं है। इसीलिए व्यापार समझौते की समीक्षा के फैसले को चीन में इसे सकारात्मक संकेत माना गया है। विश्लेषकों की राय है कि इसे देखते हुए ही चीन ने अब दोस्ताना पैगाम अमेरिका को दिया है।

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