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विरासत का तनाव: वसीयत बनाने के लिए थेरेपिस्ट की सेवाएं ले रहे लोग, घर बचाने की कवायद में जुटे लोग

Thu, 08 Oct 2026 05:49 AM IST
नितिन गौतम सुसान शेन, द न्यूयार्क टाइम्स

सार

अमेरिका में वसीयत तैयार कराने के लिए अब लोग कानूनी विशेषज्ञों और सीए के साथ ही साइकोलॉजिकल काउंसरों की भी मदद ले रहे हैं। दरअसल इस पहल को घर बचाने की कवायद माना जा रहा है। 
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वसीयत - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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वसीयत और बंटवारे को लेकर होने वाले आपसी विवादों से अपने घर-परिवार को बचाने के लिए अब लोग लीगल एक्सपर्ट्स के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं। अमेरिका के ओरेगन में रहने वाले बिल मार्टिन (55 वर्ष) खेती और पशुपालन करते हैं। उनके जीवन का सबसे बड़ा दर्द यह है कि पिता से मिले खेत के बंटवारे और व्यापारिक मतभेदों के कारण उनका अपने सगे भाई से रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है। दोनों एक ही इलाके में रहते हैं, लेकिन वर्षों से बातचीत बंद है। 
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काउंसलर और थेरेपिस्ट की मदद
अब बिल मार्टिन का एक ही सपना है, मैं दुनिया से जाऊं तो मेरे तीनों बेटे आपस में जुड़े रहें। वे त्योहार साथ मनाएं और मिलकर हंसें-बोलें। जो दर्द मैंने सहा है, वह मेरे बच्चों को न सहना पड़े। इसीलिए उन्होंने अपनी जायदाद की योजना बनाने के लिए एक प्रोफेशनल काउंसलर और थेरेपिस्ट की सेवाएं ली हैं।

ज्यादातर परिवार वसीयत बनाते समय केवल वकीलों और सीए  के पास जाते हैं, जो सिर्फ कानूनी और वित्तीय पहलुओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन रिश्तों की कड़वाहट दूर करने के लिए थेरेपिस्ट एक नया रास्ता दिखाते हैं। जो सिखाते हैं आपसी संवाद, भावनाएं और रिश्ते बनाना, मतभेदों को स्वीकार करते हुए मिठास बनाए रखना। मनोवैज्ञानक डॉ. डोना हिलियर कहती हैं, हर सदस्य की बात सुनना और सम्मान देना। मुद्दा यह नहीं है कि परिवार के हर सदस्य को हर फैसले पर सहमत किया जाए। असली बात यह है कि परिवार में असहमति को स्वीकार करने का धैर्य विकसित हो, ताकि वैचारिक मतभेद रिश्तों को न तोड़ सकें।
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मैनिटोबा, कनाडा की एक कोच और किसान एलेन फ्रोज़ का अनुमान है कि उन्होंने अपने दशकों लंबे करियर में उत्तराधिकार प्रक्रिया के माध्यम से 1,400 से अधिक परिवारों की मदद की है। उनमें से अधिकांश किसान रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैंने 1993 में लोगों के फार्महाउसों में फ्लिप चार्ट लेकर जाना शुरू किया था ताकि वे उन बातों पर चर्चा कर सकें जिन पर वे बात नहीं कर रहे थे। कोई भी आगे बढ़कर इस समस्या का सीधा सामना नहीं करना चाहता।
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