भारत ने अक्तूबर 2018 में रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का सौदा किया था। उस वक्त अमेरिका द्वारा भारत पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी के बावजूद उसने अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है। अधिकारी ने कहा कि भारत-रूस समझौते का यह मतलब नहीं कि हमने उसे कोई छिपी हुई छूट दी है, लेकिन प्रतिबंध लगाने से पहले हर मामले को अलग तरह से देखा जाएगा।
तुर्की पर हो चुकी कार्रवाई
अमेरिकी अधिकारी ने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर कहा, ऽआप देख सकते हैं अमेरिका दुश्मनों से समझौता करने वालों पर कैसी कार्रवाई कर रहा है। हमने अपने नाटो पार्टनर तुर्की को भी एस-400 खरीदने के लिए कड़ा संदेश दिया है। अमेरिका ने हाल ही में रूस से रक्षा समझौता करने के लिए तुर्की को लॉकहीड मार्टिन के एफ-35 फाइटर जेट बेचने पर रोक लगाई थी।
एस-400 मिसाइल सिस्टम 400 किमी के भीतर मिसाइलों व पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को खत्म कर सकता है। यह सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो चीन व पाक की एटमी क्षमता वाली बैलेस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा।
यह सिस्टम अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। यह 36 एटमी क्षमता वाली मिसाइलों को एक साथ नष्ट कर सकता है।
जेट विमान बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन के शीर्ष अधिकारी विवेक लाल ने कहा है कि भारत-अमेरिका के बीच औद्योगिक सुरक्षा समझौता (आईएसए) ऐतिहासिक है और भारत के निजी उद्योग के साथ तकनीकी हस्तांतरण की सुविधा देता है।
इससे आपसी हितों का समर्थन करने के मकसद से लाइसेंस के लिए आवेदन करने समेत व्यापार प्रक्रिया में भी आसानी होगी।
बता दें कि इस समझौते पर दिसंबर 2019 में टू प्लस टू वार्ता के दौरान हस्ताक्षर हुए थे। लाल ने कहा कि आईएसए समझौते से मेक इन इंडिया समेत औद्योगिक व रक्षा सहयोग में इजाफा होने के साथ रक्षा मामलों में डाटा हासिल करने का अतिरिक्त लाभ होगा।