तुर्की का रूस से S-400 मिसाइल खरीदना महंगा पड़ गया है क्योंकि अमेरिका ने तुर्की को एफ-35 बेचने से साफ इनकार कर दिया है। नाटो के प्रमुख सहयोगी के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का यह फैसला भारत के लिए संकेत भी हो सकता है क्योंकि भारत ने भी अमेरिका की सलाह के खिलाफ जाकर एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए रूस से समझौता किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात को सिरे से खारिज किया कि तुर्की, अमेरिका से जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली पैट्रियाट खरीदना चाहते थे तो ओबामा प्रशासन ने इसे बेची नहीं। ट्रंप ने आगे कहा कि एक समय तुर्की से हमारे संबंध बहुत अच्छे थे लेकिन तुर्की को अन्य मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए मजबूर किया गया, इसलिए अब हम आपको एफ-35 लड़ाकू विमान नहीं बेच रहे हैं।
मौजूदा अमेरिकी कानूनों के अनुसार, कोई भी देश अगर रूस से बड़े रक्षा उपकरण खरीदता है तो उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिकी संसद ने इस कानून में थोड़ी छूट दी है। भारत में कई लोगों का मानना है कि यह छूट उनके देश के लिए है। हालांकि, अमेरिका अधिकारियों ने आगाह किया कि किसी भी देश के लिए व्यापक छूट नहीं है।