अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। दोनों नेता फ्रांस में द्विपक्षीय बातचीत की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें व्यापार, तकनीक, निवेश और वैश्विक सुरक्षा मुख्य एजेंडा होंगे। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बताया, 'राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच गहरी दोस्ती है। उनके नेतृत्व में, ट्रंप प्रशासन और भारत सरकार हमारे दोनों देशों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।'
फरवरी की शिखर बैठक के बाद पहली बैठक
फरवरी में हुई शिखर बैठक के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब संभावित व्यापार समझौते पर चर्चा चल रही है और पश्चिम एशिया के संकट को हल करने के लिए राजनयिक प्रयास जारी हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिलेंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता आर्थिक विकास, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश साझेदारी और कई वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
मार्को रूबियो की भारत यात्रा के बाद पहली मुलाकात
कुश देसाई ने बताया, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी के लिए अपना समर्थन जताया है।' उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया भारत यात्रा का उल्लेख किया और कहा, 'मार्को रुबियो ने व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करने के ट्रंप के प्रयासों को आगे बढ़ाया है।' उन्होंने कहा, 'विदेश मंत्री मार्को रूबियो की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करना भी शामिल है।'
दोनों लोकतंत्र के मजबूत रिश्ते
वहीं, विशेषज्ञों ने कहा कि इस बैठक से ठोस परिणामों के साथ-साथ मजबूत राजनीतिक संदेश की भी उम्मीद है। हडसन इंस्टीट्यूट की अपर्णा पांडे ने कहा कि इस बैठक से काफी अपेक्षाएं हैं। अपर्णा पांडे ने कहा, 'पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह बैठक पिछले फरवरी में हुई शिखर बैठक के बाद पहली होगी। दोनों पक्षों को इस बैठक से काफी उम्मीदें हैं, जो पश्चिम एशिया संकट के संभावित समाधान और व्यापार समझौते पर चर्चा के बीच हो रही है।' उन्होंने कहा, 'दोनों नेता यह दर्शाना चाहेंगे कि मुश्किल हालात के बावजूद दोनों लोकतंत्रों के बीच रिश्ते मजबूत बने हुए हैं और वे रक्षा व तकनीक से जुड़े कुछ समझौतों की घोषणा करने के इच्छुक होंगे।'
अलब्राइट स्टोनब्रिज ग्रुप के पार्टनर आत्मन त्रिवेदी ने बड़ी सफलता की उम्मीद न रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, 'उम्मीदें सीमित होनी चाहिए और मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि ट्रंप और मोदी ऊर्जा, रक्षा और तकनीमक सहयोग में लंबे समय से चले आ रहे साझा हितों के लिए एक-दूसरे के महत्व को फिर से दोहराएं।'