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US Vs China: चीन का तकनीक में आगे निकलना होगा बेहद खतरनाक

Tue, 20 Sep 2022 06:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

US Vs China: अमेरिकी रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि उन खतरों को देखते हुए अमेरिका को अपने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए। लेकिन अमेरिकी योजना चीन की कार्बन कॉपी नहीं होनी चाहिए...
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US Vs China: अमेरिका-चीन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका ने अगर रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाए रखने के उपायों में ताकत नहीं झोंकी, तो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वह चीन से पिछड़ जाएगा। ये चेतावनी एक नई अध्ययन रिपोर्ट में दी गई है। यह अध्ययन अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने कराया है। अध्ययन के लिए उसने नेशनल सिक्योरिटी कमीशन ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एनएससीएआई) का गठन किया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट को- मिड डिकेड चैलेंजेज टू नेशनल कॉम्पिटिटिवनेस- के नाम से जारी किया है।

रिपोर्ट के आरंभिक हिस्से में उन खतरों का जिक्र किया गया है, जो आधुनिक तकनीक में चीन के आगे निकल जाने से अमेरिका के लिए पैदा होंगे। कहा गया है कि उस अवस्था में चीन का विश्व अर्थव्यवस्था पर दबदबा बना जाएगा और वह अगली पीढ़ियों की टेक्नोलॉजी को विकसित कर खरबों डॉलर कमाने में सक्षम हो जाएगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उस अवस्था में चीन अपनी सफलता के आधार पर अपनी ‘तानाशाही व्यवस्था’ के बेहतर होने का दावा करेगा। इस कामयाबी के जरिए चीन अपने राजनीतिक मकसदों को पूरा करते हुए निगरानी तकनीक को दुनिया भर में फैलाएगा, जिससे व्यक्ति स्वतंत्रता के लिए खतरे पैदा होंगे।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि उन खतरों को देखते हुए अमेरिका को अपने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए। लेकिन अमेरिकी योजना चीन की कार्बन कॉपी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी योजना ‘राज्य-केंद्रित तानाशाही मॉडल’ पर आधारित नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अपने विकास को स्वरूप देने में करना चाहिए। उसे अपने सहयोगी देशों के साथ मिल कर तकनीक का वैकल्पिक मॉडल दुनिया के सामने रखना चाहिए, जिससे यह संदेश जाए कि बिना तानाशाही व्यवस्था को अपनाए भी देश सफल और समृद्ध हो सकते हैं।

वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आलोचकों ने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को ‘शीत युद्ध की सोच’ से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा है कि रिपोर्ट में जो बाइडन प्रशासन की विचारधारा को दोहरा दिया गया है, जिसमें मौजूदा दुनिया को लोकतंत्र बनाम तानाशाही के टकराव के रूप में पेश किया जाता है। इस रिपोर्ट में विशेषज्ञ माइकल स्वाइन के 2021 में मशहूर अमेरिकी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी में छपे एक लेख का हवाला भी दिया गया है।

स्वाइन ने उस लेख में कहा थ कि चीन सैनिक ताकत के जरिए तब तक अमेरिका को नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक उसने खुद को भी नष्ट करने का मन ना बना लिया हो। इसकी वजह परमाणु और परंपरागत हथियारों के मामले में अमेरिका की भारी बढ़त है। उन्होंने कहा था कि इसलिए चीन की तकनीकी प्रगति से भयभीत होने का कोई ठोस आधार नहीं है।

एशिया टाइम्स ने चीनी मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बाओगांग का यह कहते हवाला दिया है कि तानाशाही बनाम लोकतंत्र के कथानक पर जरूरत से ज्यादा जोर देकर अमेरिका तमाम देशों को अमेरिका या चीन में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर कर रहा है। ये नजरिया दुनिया के हित में नहीं है।

लेकिन एनएससीएआई की रिपोर्ट इस निष्कर्ष के साथ खत्म हुई है- ‘क्या अमेरिका चुनौती के अनुरूप तैयारी दिखा कर अपनी संभावनाओं को साकार करेगा, इस प्रश्न के उत्तर से ही यह तय होगा कि 21वीं सदी में विजेता कौन रहेगा।’

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