ट्रंप प्रशासन की सख्त वीजा नीतियों के कारण भारतीय नागरिक और पेशेवर अब स्वदेश का रुख कर रहे हैं। अगस्त 2026 में पूरे अमेरिका में 40,000 से अधिक मकानों के फॉरक्लोजर दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 12.83 फीसदी अधिक है।
अमेरिका में छंटनी , एच-1बी वीजा की कड़ी शर्तों, पीईएआरएम-ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के अचानक रोके जाने और कानूनी अनिश्चितताओं के बीच सैकड़ों भारतीय आईटी पेशेवर अपना अमेरिकी सपना पीछे छोड़कर भारत लौट रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर व आपातकालीन हो गई है कि कई टेक पेशेवर संपत्ति बेचने या समेटने का समय न मिलने के कारण अमेरिका में अपने घर, फर्नीचर और गाड़ियां तक छोड़कर या कबाड़ी के पास भेजकर रातों-रात भारत आ रहे हैं। हैदराबाद लौटे एक टेक पेशेवर ने मीडिया को बताया कि वीजा और नौकरी की अनिश्चितता के बीच मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा था
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प्रॉपर्टी मार्केट और मार्गेज का संकट
कई भारतीय परिवारों ने अमेरिका में बड़े घर खरीदे थे। लेकिन अचानक नौकरी जाने या वीजा अवधि खत्म होने पर वे अपने घर बेच नहीं पाए। कुछ क्षेत्रों में रियल एस्टेट की कीमतें गिरने से घर की वैल्यू कम हो गई, जिससे उन्हें प्रॉपर्टी बेचना घाटे का सौदा लगा या समय ही नहीं मिला।
एच-1बी वीजा, ग्रीन कार्ड और जॉब मार्केट का दबाव
हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा बड़ी आईटी कंपनियों और आउटसोर्सिंग फर्मों के लिए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया पर रोक/समीक्षा लगाने से भारतीयों का इंतजार दशकों लंबा हो गया है। एच-1 बी वीजा पर नौकरी जाने के बाद केवल 60 दिनों के भीतर नई नौकरी खोजना अनिवार्य होता है।
अकेले टेक्सास राज्य में फॉरक्लोजर के 4,961 मामले सामने आए, जिसमें अगस्त 2026 में पिछले साल की तुलना में 43.46 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हम वहां सिर्फ जी नहीं रहे थे, गुजारा कर रहे थे
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भारत लौटे अधिकांश पेशेवरों का कहना है कि लगातार वीजा का डर, बढ़ती महंगाई, और अमेरिका में छंटनी का मानसिक तनाव इतना बढ़ गया था कि अब भारत में अपने परिवार के पास रहकर काम करना ज़्यादा सुरक्षित और शांतिपूर्ण लग रहा है।
भारत के टेक सेक्टर भी हुए पहले से बेहतर
भारत लौट रहे टेक पेशेवरों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था और टेक सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं। कई वापसी करने वाले इंजीनियर अब भारतीय टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स या अमेरिका की ही भारत-स्थित जीसीसी में काम कर रहे हैं।