अमेरिका के उपराष्ट्रपित जेडी वेंस पोप फ्रांसिस से मुलाकत के एक दिन बाद उनके निधन पर दुखी हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मुझे अभी पोप फ्रांसिस के निधन के बारे में पता चला। मेरी संवेदनाएं दुनिया भर के उन लाखों ईसाइयों के साथ हैं जो उनसे प्यार करते थे।
कैथोलिक चर्च के शीर्ष धार्मिक नेता पोप फ्रांसिस का सोमवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से ब्रोंकाइटिस नाम की बीमारी से पीड़ित थे। पोप ने निधन से एक दिन पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपित जेडी वेंस ने उनसे संक्षिप्त मुलाकात की थी। भारत दौरे से पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईस्टर रविवार को पोप फ्रांसिस से ये मुलाकात की थी।
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पोप के निधन पर जेडी वेंस
अमेरिका के उपराष्ट्रपित जेडी वेंस पोप फ्रांसिस से मुलाकत के एक दिन बाद उनके निधन पर दुखी हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मुझे अभी पोप फ्रांसिस के निधन के बारे में पता चला। मेरी संवेदनाएं दुनिया भर के उन लाखों ईसाइयों के साथ हैं जो उनसे प्यार करते थे।
उन्होने आगे लिखा कि कल उन्हें देखकर मुझे खुशी हुई, हालांकि वे जाहिर तौर पर बहुत बीमार थे। लेकिन मैं उन्हें हमेशा कोविड के शुरुआती दिनों में दिए गए उनके प्रवचन के लिए याद रखूंगा। यह वाकई बहुत खूबसूरत था। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
2019 में जेडी ने किया था धर्म परिवर्तन
जेडी वेंस हाल ही (2019) में कैथोलिक धर्म में धर्मांतरित हुए हैं। इसस पहले वह नास्तिक थे। भारत आने से पहले जेडी वेंस अपनी पत्नी उषा और अपने तीन छोटे बच्चों के साथ काम और अवकाश के सिलसिले में कई दिनों से रोम में थे।
एक दिन पहले ही ईस्टर पर लोगों से की थी मुलाकात
पोप फ्रांसिस ने अपने निधन से एक दिन पहले ही ईस्टर के मौके पर वेटिकन में श्रद्धालुओं से मुलाकात की थी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पहली बार पोप फ्रांसिस लोगों से मिले थे। इस दौरान पोप फ्रांसिस ने लोगों को ईस्टर की शुभकामनाएं भी दी थीं।
कौन थे पोप फ्रांसिस
पोप फ्रांसिस का जन्म 17 दिसंबर 1936 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनका नाम जोर्गे मारियो बर्गोलियो था। पोप की उपाधि पाने वाले पोप फ्रांसिस पहले जेसुइट थे। धर्म की राह पर आने से पहले जोर्गे मारियो बर्गोलियो ने बतौर केमिकल टेक्निशियन अपने करियर का शुरुआत की और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम किया। इसी दौरान उनका धर्म की तरफ झुकाव बढ़ा और वे चर्च से जुड़ गए। जब पोप 21 साल के थे, तो वे न्यूमोनिया से पीड़ित हो गए, इसके चलते उनके फेफड़े का एक हिस्सा भी निकालना पड़ा। साल 1958 में वे ईसाई धर्म की एक परंपरा जेसुइट से जुड़ गए और धार्मिक शिक्षा देना शुरू कर दिया। साल 1969 में वे पादरी बने।
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