अमेरिका ने चीन से मांग की है कि वह तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु 11वें पंचेन लामा को रिहा करे। पंचेन लामा जब छह साल के थे, तभी चीनी सरकार के अधिकारियों द्वारा उन्हें कैद किया जा चुका है। तिब्बत के गेझुन चोएक्यी न्यीमा को 1995 में 11वां पंचेन लामा घोषित किया गया जो दलाई लामा के बाद क्षेत्र में बौद्ध धर्म से जुड़ा दूसरा सबसे बड़ा आध्यात्मिक पद है।
इस घोषणा के कुछ दिन बाद ही न्यीमा लापता होकर दुनिया के सबसे कम उम्र के राजनीतिक कैदी बन गए थे। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी के लिए अमेरिका के विशेष दूत सैम ब्रॉउनबैक ने एक सम्मलेन के दौरान कहा, ‘वह कहां हैं, इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा हम पंचेन लामा को रिहा करने को चीनी प्राधिकारियों पर दबाव डालते रहेंगे। दुनिया को बताया जाए कि वह कहां हैं।’
ब्राउनबैक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि चीन अगला दलाई लामा नियुक्त करने के अधिकार में बारे में लगातार बात करता रहता है, जबकि उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाले अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने विदेश मंत्रालय से दोबारा मांग की है कि वह तिब्बती मामले के विशेष समन्वयक के रिक्त पद पर जल्द भर्ती करे।
चीन नहीं चाहता दलाई लामा का उत्तराधिकार
चीन सरकार ने अपनी ओर से दलाई लामा का एक उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। वह कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नजर आ चुका है। हालांकि, उसे तिब्बती लोगों का समर्थन हासिल नहीं है। चीन नहीं चाहता कि दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी की घोषणा हो। ऐसा करने से दुनिया भर में तिब्बत की आजादी की मुहिम कमजोर होगी। तिब्बती बौद्ध के 14 वें धर्मगुरु दूसरे पंचेन लामा की घोषणा करना चाहते हैं।