डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन को बुरा और भ्रष्ट बताया है। बोल्टन पर गोपनीय दस्तावेजों को अपने पास रखने का आरोप है। वह अपना जुर्म कबूल कर सकते हैं और उन्हें भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा भी हो सकती है। इस मामले की सुनवाई 26 जून को होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन पर तीखा हमला किया है। ट्रंप ने बोल्टन को एक बुरा और भ्रष्ट आदमी करार दिया है। उन्होंने कहा कि बोल्टन अपनी बेईमानी की सजा भुगत रहे हैं। शनिवार को चिप्पेवा फॉल्स की यात्रा के दौरान एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने बोल्टन की जमकर आलोचना की।
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क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि जॉन बोल्टन एक बेईमान इंसान हैं और वह बिल्कुल भी समझदार नहीं हैं। ट्रंप के मुताबिक, बोल्टन को युद्ध करने का बहुत शौक था। वह हर उस व्यक्ति के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहते थे जो उनके सामने बोलता था। उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी बोल्टन के प्रशंसक नहीं रहे और उन्हें केवल एक खास उद्देश्य के लिए काम पर रखा था।
ट्रप ने दावा किया कि बोल्टन ने पूर्व राष्ट्रपति बुश के समय भी बहुत सी समस्याएं खड़ी की थीं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि बोल्टन की युद्ध वाली सलाहों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि वह कभी उनकी बात नहीं सुनते थे। ट्रंप ने बोल्टन की किताब का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सारी जानकारी ली और उसका गलत इस्तेमाल किया। ट्रंप ने कहा कि बोल्टन को पकड़ लिया गया है और अब वह अपनी बेईमानी की कीमत चुका रहे हैं।
जॉन बोल्टन कस रहा कानूनी शिकंजा
इस बीच, जॉन बोल्टन पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि बोल्टन गोपनीय दस्तावेजों को गलत तरीके से रखने के मामले में अपना दोष स्वीकार कर सकते हैं। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील दस्तावेजों को अवैध रूप से अपने पास रखने का एक गंभीर आरोप है। इस मामले में बोल्टन 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक का जुर्माना देने पर सहमत हुए हैं।
मैरीलैंड के सरकारी वकीलों ने बोल्टन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान की डायरी के पन्ने अपने घर में छिपाकर रखे थे। अगर वह दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 0 से लेकर 60 महीने तक की जेल हो सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 जून को होने की उम्मीद है। ट्रंप ने कहा कि बोल्टन एक कट्टरपंथी थे जो केवल युद्ध की भाषा समझते थे।