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US: अमेरिका में जन्म के बाद मिलने वाली नागरिकता छीनने पर फिर फंसे ट्रंप, अमेरिकी अदालत ने चौथी बार लगाई रोक

Fri, 08 Aug 2025 08:40 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका की मैरीलैंड अदालत ने ट्रंप के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता से वंचित करने की बात कही गई थी। जज डेबोरा बोर्डमैन ने इसे संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन बताया। यह चौथी बार है जब किसी अदालत ने इस नीति को खारिज
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI
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विस्तार
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 डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक और बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय अदालत ने ट्रंप के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चों को नागरिकता नहीं दी जाएगी। यह फैसला देशभर में चौथी बार आया है जब ट्रंप की जन्माधिकार नीति को न्यायालय ने अवैध बताया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बावजूद हुआ, जिससे पूरे देश में इस आदेश के लागू होने पर प्रभाव पड़ा
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मैरीलैंड की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डेबोरा बोर्डमैन ने साफ किया कि ट्रंप का आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चे, चाहे उनके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो, नागरिकता के हकदार हैं। अदालत ने यह आदेश 19 फरवरी 2025 के बाद जन्म लेने वाले सभी बच्चों पर लागू किया है, जिन्हें इस आदेश से नुकसान हो सकता था।

सुप्रीम कोर्ट की पृष्ठभूमि के बावजूद निर्णय
इससे पहले, जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि निचली अदालतें सामान्य रूप से राष्ट्रव्यापी निषेधाज्ञा जारी नहीं कर सकतीं। इसके बावजूद, बोर्डमैन ने अपने निर्णय में कहा कि चूंकि यह मामला एक वर्ग-कार्रवाई मुकदमा है, इसलिए इसका प्रभाव पूरे देश पर हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप का आदेश लागू हुआ तो इससे प्रभावित बच्चों को अपूरणीय नुकसान होगा।
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ट्रंप प्रशासन की योजना और उसका विरोध
ट्रंप का जनवरी में जारी किया गया आदेश अवैध प्रवासियों या अस्थायी निवासियों के बच्चों को नागरिकता देने से रोकने के लिए था। यह आदेश प्रवासी नीतियों को सख्त बनाने की उनकी रणनीति का हिस्सा था। परंतु मानवाधिकार संगठनों और कई अमेरिकी राज्यों ने इसका विरोध किया और इसे अमानवीय बताया। कोर्ट में दायर याचिकाओं में इसे संविधान विरोधी करार दिया गया।
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न्यायिक प्रक्रिया और अपील की संभावना
बोर्डमैन इससे पहले फरवरी में भी इसी तरह की एक अस्थायी निषेधाज्ञा जारी कर चुकी थीं। बाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते यह निषेधाज्ञा अस्थिर हो गई थी। अब चौथी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने मामला फिर से बोर्डमैन को सौंपा, और उन्होंने इस पर अंतिम निर्णय दिया। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन संभावना है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है।
 
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