एल सल्वाडोर के नागरिक किल्मार अब्रेगो गार्सिया का मामला अमेरिका की अप्रवासन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गलती से डिपोर्ट किए जाने और जेल भेजे जाने के बाद अदालत ने उसे वापस बुलाया। अब सरकार ने भरोसा दिया है कि जज के आदेश तक उसे हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रवासन नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एल सल्वाडोर के नागरिक किल्मार अब्रेगो गार्सिया को गलती से उनके देश भेज दिया गया, जहां उन्हें जेल में रहना पड़ा। ऐसे में अब अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। यह बात मंगलवार को कोर्ट में दाखिल एक सरकारी दस्तावेज में कही गई। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई है, बल्कि अमेरिका की अप्रवासन व्यवस्था की बड़ी परीक्षा भी बन गया है।
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गौरतलब है कि अब्रेगो गार्सिया का आरोप है कि उसे जानबूझकर फंसाया जा रहा है और उसके खिलाफ चल रहा मानव तस्करी का मामला सरकार की बदले की कार्रवाई है, क्योंकि प्रशासन को उसकी गलत डिपोर्टेशन को लेकर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। इसी आधार पर उसने कोर्ट से केस रद्द करने की मांग की है।
वहीं दूसरी ओर मामले की सुनवाई कर रहे जज वेवरली क्रेंशॉ ने भी संदेह जताया है कि अब्रेगो गार्सिया पर मुकदमा चलाने का फैसला किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि जस्टिस डिपार्टमेंट के ऊपरी अधिकारियों की सहमति से लिया गया। जज ने एक ईमेल का हवाला दिया, जिसमें डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश की ओर से गार्सिया पर जल्द से जल्द आरोप लगाने की इच्छा जताई गई थी।