जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने के कुछ अन्य कारण भी गिनाये हैं। जिनमें रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप अभी तक यूक्रेन जंग को खत्म करने के अपने चुनावी वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं। जिसके कारण भी उनमें खिसियाहट है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की हर ओर आलोचना हो रही है। कई अमेरिकी अर्थशास्त्री इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी विदेश नीति के लिए आत्मघाती कदम बता रहे हैं। वहीं, अब अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी जेफरीज ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ का कारण भारत-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता के उनके दावे को स्वीकृति न मिलना है। जिसके कारण वे व्यक्तिगत तौर पर नाराज हो गए हैं और ऐसे कदम उठा रहे हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने मई में दोनों देशों के बीच चार दिवसीय सैन्य तनाव के बाद अपने हस्तक्षेप का दावा किया था, लेकिन उन्हें भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को समाप्त करने का क्रेडिट नहीं मिला, जैसाकि वे चाहते थे। भारत ने ट्रंप के दावों को लगातार नकारते हुए पाकिस्तान के साथ संघर्ष में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को खारिज किया है। जेफरीज ने बताया कि भारी आर्थिक नुकसान के बावजूद इस रुख को भारत ने बरकरार रखा है।
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि भारत की असहमति के कारण राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए वैश्विक रूप से मिल रही स्वीकार्यता भी कमजोर पड़ी है।
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इसके अलावा जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने के कुछ अन्य कारण भी गिनाये हैं। जिनमें रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप अभी तक यूक्रेन जंग को खत्म करने के अपने चुनावी वादे को पूरा नहीं कर पाए हैं। जिसके कारण भी उनमें खिसियाहट है। वहीं, भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखना भी वॉशिंगटन में असंतोष का कारण बना। लेकिन रिपोर्ट का दावा है कि टैरिफ का असली और मूल कारण भारत का पाकिस्तान मामले में ट्रंप को दखल न देने देना है।
जेफरीज ने ट्रंप के इस कदम को नीति स्तर पर समझ की कमी का उदाहरण भी करार दिया। यह चेतावनी दी गई कि ऐसे फैसले अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं, क्योंकि भारत को दूर धकेलने से वह चीन के और करीब जा सकता है।