अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब संवैधानिक संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय (एससीओटीयूएस) ने एक अहम फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को आर्थिक आपातकाल घोषित कर व्यापक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार नहीं है।
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जनता की राय भी अहम
जनवरी में हुए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना है कि ट्रंप ने दूसरे देशों पर नए टैरिफ लगाकर हद पार कर दी। वहीं, 76 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई कि इन नीतियों से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी। महंगाई पहले से ही अमेरिकी मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में यह फैसला चुनावी माहौल को और गरमा सकता है।
आगे क्या होगा?
व्हाइट हाउस संकेत दे चुका है कि वह अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर टैरिफ नीति को बचाने की कोशिश करेगा। लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और लंबी खिंच सकती है। रिपब्लिकन रणनीतिकार डग हेये का कहना है कि ट्रंप इस फैसले से खुश नहीं होंगे, लेकिन वे अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने का कोई नया रास्ता जरूर तलाशेंगे।