फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

US Tariffs: ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी, क्या ‘लिबरेशन डे’ शुल्क पर अब भी लटकी है तलवार?

Fri, 09 Jan 2026 10:16 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

दुनियाभर में चर्चा का विषय बने ट्रंप के टैरिफ मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपना  फैसला टाल दिया है। सवाल आज भी यही है कि क्या राष्ट्रपति IEEPA कानून के तहत संसद की मंजूरी बिना टैरिफ लगा सकते हैं? दूसरा कि अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ गया तो क्या ट्रंप को ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ हटाने पड़ेंगे, और इसका भारत पर कैसा असर पड़ेगा?

विज्ञापन
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति जहां एक ओर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर अब इस मामल में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि वह फिलहाल ट्रंप के टैरिफ से जुड़े अहम मामले पर कोई फैसला नहीं सुनाएगा। यह मामला ट्रंप की तरफ से लगाए गए बड़े पैमाने के आयात शुल्क यानी टैरिफ से जुड़ा है, जिसे लेकर दुनिया भर की नजरें कोर्ट पर टिकी हुई थीं।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिर्फ एक तकनीकी आपराधिक मामले पर फैसला दिया, जबकि ट्रंप के टैरिफ वाले केस पर कोई निर्णय नहीं आया। इस मामले की सुनवाई नवंबर में हो चुकी है।यह केस लर्निंग रिसोर्सेज बनाम ट्रंप नाम से जाना जाता है। इसमें यह तय होना है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति आपातकालीन कानून IEEPA का इस्तेमाल करके बिना संसद की मंजूरी के टैरिफ लगा सकते हैं या नहीं।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- US: कैरिबियन सागर में अमेरिका की एक और बड़ी कार्रवाई, वेनेजुएला से जुड़ा पांचवां प्रतिबंधित तेल टैंकर लिया कब्जे में

ट्रंप के खिलाफ फैसला होता तो क्या होता?
सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला देता है, तो उनके द्वारा लगाए गए ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ को हटाना पड़ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे में इन टैरिफ का कोई कानूनी आधार नहीं बचेगा और सरकार को इन्हें वापस लेना होगा या कोर्ट रोक लगा सकता है। हालांकि ट्रंप चाहें तो दूसरे कानूनों के तहत फिर से टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए नई जांच और सार्वजनिक कारण बताने होंगे, जिससे प्रक्रिया लंबी और विवादित हो सकती है।

विज्ञापन


प्रभावित हो सकती हैं व्यापार वार्ताएं
दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रंप की आपातकालीन शक्तियों को कोर्ट खारिज करता है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और भारत के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि अब तक तीन निचली अदालतें ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दे चुकी हैं। अदालतों का कहना है कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं दी है और ऐसा करना संविधान के खिलाफ है।

ये भी पढ़ें:- जयशंकर का फ्रांस दौरा: संसदीय मैत्री समूह से की मुलाकात; UNESCO महानिदेशक से किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

भारत समेत पूरी दुनिया की थी नजर

गौरतलब है कि यह मामला भारत समेत पूरी दुनिया में ध्यान से देखा जा रहा है, क्योंकि यह राष्ट्रपति की शक्तियों और संसद के अधिकारों से जुड़ा अहम सवाल है। इस मामले में दो बड़े सवाल हैं। पहला यह कि मामला किस अदालत में सुना जाना चाहिए। दूसरा और सबसे अहम सवाल यह है कि क्या IEEPA कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति देता है या नहीं।

विज्ञापन


अन्य वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें