अगले महीन दिल्ली में आयोजित होने जा रहा जी-20 शिखर सम्मेलन को कामयाब बनाने के लिए भारत पूरी ताकत के साथ जुटा है, लेकिन पिछले वर्ष जिस तरह से इंडोनेशिया में जी-20 शिखर सम्मेलन का हश्र हुआ, कुछ इसी तरह इस बार भी शिखर सम्मेलन यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की भेंट चढ़ सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने मंगलवार को कहा, यूक्रेन-रूस युद्ध वैश्विक चिंता का विषय है। अमेरिका के लिए इस युद्ध पर चर्चा करना शीर्ष प्राथमिकता है। लिहाजा, अगले महीने भारत में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में अमेरिका इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएगा। असल में मिलर से पूछा गया था कि क्या बाइडन नई दिल्ली में होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन के मुद्दे पर उतना ही जोर देंगे, जितना पिछले वर्ष बाली में दिया था। जवाब में मिलर ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के लिए यूक्रेन में संघर्ष पर चर्चा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान बाइडन अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ यूक्रेन युद्ध पर विस्तार से चर्चा करना चाहते हैं।
जी-20 शिखर सम्मेलन से यूक्रेन संकट का हल निकलने के सवाल पर मैथ्यू मिलर ने कहा, अमेरिका सभी सहयोगियों और साझेदारों के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहा है। यह ऐसा मुद्दा है, जो सभी मंचों और सभी तरह की बातचीत में उठाया जा रहा है।
भारत के लिए बढ़ेगी मुश्किल
भारत में हो रही जी-20 की तमाम बैठकों की साझा घोषणा पत्र में पश्चिमी देश रूस के खिलाफ कठोर आलोचना को शामिल करना चाहते हैं। जबकि, साझा घोषणा पत्र तभी जारी होगा, जब सभी देश पूरी तरह सहमत हों। बहरहाल, रूस, चीन के अलावा भारत भी रूस के खिलाफ कठोर आलोचना के पक्ष में नहीं है। ऐसे में साझा घोषणा पत्र जारी करना, तो मुश्किल ही होगा, वहीं इस बात की भी आशंका है कि पश्चिमी देश बैठक को मूल मुद्दे से हटाकर यूक्रेन संकट की तरफ खींच ले जाएं, जिससे कोई सार्थक नतीजे न निकल पाएं।
पिछले वर्ष खेमेबाजी में जाया हुआ वक्त
पिछले वर्ष जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मेजबान इंडोनिशया के लिए बेहद मुश्किल हालात बन गए थे, क्योंकि ज्यादातर देश खेमों में बंट गए, जिनमें एक खेमा अमेरिका के नेतृत्व में यूक्रेन का समर्थक था, जबकि दूसरा खेमा रूस के खिलाफ जी-20 के मंच से कठोर वक्तव्य देने के खिलाफ था। आखिर में बैठक के बाद साझा घोषणा पत्र जारी नहीं किया गया और इंडोनेशिया ने अध्यक्षीय बयान के साथ इसका समापन किया।