भारत का लक्ष्य साल 2030 तक करीब 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करना है। बाइडन प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि अब अमेरिका यह लक्ष्य हासिल करने में भारत की मदद करेगा।
इसके लिए अमेरिका ने कई देशों का एक गठजोड़ बनाया है। बताया जा रहा है कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में करीब 600 अरब डॉलर की लागत आएगी।
जलवायु विषयों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के विशेष दूत जॉन केरी ने विश्व के शीर्ष ऊर्जा सम्मेलन आईएचएस सीईआरए वीक के दौरान कहा कि अमेरिका ने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में कोष के जरिये भारत की मदद करने को इच्छुक कई देशों का एक समूह बनाया है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस लक्ष्य को पूरा करना शायद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, लेकिन वह नेतृत्व करने और यहां एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने आगे कहा, 'मैंने कई देशों के एक छोटे से संघ को एक साथ रखा है जो भारत की वित्तीय सहायता के लिए तैयार हैं।'
केरी ने कहा, 'हम अपने देश में प्रमुख निवेश गृहों और परिसंपत्ति प्रबंधकों के साथ काम कर रहे हैं ताकि यह निर्धारित करने की कोशिश की जा सके कि निजी क्षेत्र की पूंजी को सही जगह पर कैसे निर्देशित किया जा सकता है ताकि हम इस लक्ष्य को पाने के लिए तेजी से काम कर सकें।'