अमेरिका के एक शीर्ष सीनेटर ने गर्भपात के संबंध में मदर टेरेसा के एक उद्धरण को घृणा अपराध की श्रेणी में डालकर ब्लॉक करने के लिए ट्विटर और फेसबुक की आलोचना करते हुए कहा है कि इन दो सोशल मीडिया दिग्गजों द्वारा सेंसरशिप का तरीका "वास्तव में खतरनाक" है।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक मदर टेरेसा को 2016 में वेटिकन में पोप फ्रांसिस द्वारा एक संत घोषित किया गया था। टेरेसा को भारत में गरीबों के लिए किये गये उनके काम के लिए भी सम्मानित किया गया है।
टेक्सास के सीनेटर टैड क्रूज ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि ट्विटर और फेसबुक के शीर्ष अधिकारी गर्भपात पर मदर टेरेसा के उद्धरण को घृणा अपराध की श्रेणी में डालकर ब्लॉक किये जाने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दे सके।
उन्होंने इसे एक खतरनाक स्थिति बताया।
क्रूज ने बुधवार को कांग्रेस की सुनवाई के दौरान पूछा, "यहां एक ट्वीट किया गया है जिसमें कहा गया है कि गर्भपात महिला विरोधी कदम है और यह मदर टेरेसा का एक उद्धरण है और यह ट्वीट ब्लॉक किया गया था। यह विचार करने वाली बात है कि मदर टेरेसा के उद्धरण को अब घृणास्पद समझा जाये। क्या आप में से कोई भी इस प्रस्ताव से सहमत होगा कि मदर टेरेसा अभद्र भाषा जारी कर रही हैं? क्या यह अभद्र भाषा है?"
क्रूज ने आरोप लगाया कि गूगल ने उनके विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया और ट्विटर ने उनके वेब पेज को डाउन कर दिया।
सवाल का सीधा जवाब नहीं देते हुए फेसबुक के पब्लिक पॉलिसी निदेशक नील पॉट्स ने कहा कि इसमें से बहुत कुछ इरादों और बयानों या छवियों या साझा किए गए वीडियो के संदर्भ पर निर्भर करता है।
ट्विटर के पब्लिक पॉलिसी निदेशक कैरोल्स मोंजे ने कहा कि हर ट्वीट के पीछे संदर्भ होता है और हर फैसले का संदर्भ होता है।