दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत के रुख पर अमेरिकी दृष्टिकोण व्यक्त किया। शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को नहीं लगता है कि भारत जल्द ही रूस के साथ संबंध समाप्त करने जा रहा है, लेकिन अमेरिका आशा करता है कि भारत यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेगा।
मार्च में होने वाली आगामी विदेश मंत्रियों की बैठक जी-20 की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक है। जाहिर है कि यूक्रेन युद्ध को एक साल पूरे हो गए हैं और इस दौरान यूक्रेन ने वैश्विक शासन के साथ कई चुनौतियों को साझा किया है। ऐसे में जी-20, जो कई देशों के प्रतिनिधित्व वाली संस्था है उससे उम्मीद है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि जी-20 को किस आधार पर बनाया गया था।
भारत के अध्यक्ष होने के नाते कई देश आर्थिक स्थिरता लाने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे समय में जब संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे बहुपक्षीय निकायों को इसमें सफलता नहीं मिली है जबकि इनका काम शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। ब्लिंकन चीन और रूस समेत 20 देशों के विदेश मंत्रियों के समूह (जी20) की बैठक में हिस्सा लेंगे। हालांकि, नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री किन गैंग (Qin Gang) या रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ ब्लिंकन के बैठने की संभावनाओं के बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।
भारत के पड़ोसी देशों को ऋण के जाल में फंसाकर जबरन लाभ उठा सकता है चीन: अमेरिका
सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने कहा कि अमेरिका इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि चीन द्वारा भारत के निकटवर्ती पड़ोसी देश पाकिस्तान और श्रीलंका को दिए जा रहे कर्ज का इस्तेमाल जबरन फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। डोनाल्ड लू ने संवाददाताओं से कहा, भारत के निकटवर्ती देशों को चीन की ओर से दिए जा रहे कर्ज को लेकर हम अत्यधिक चिंतित हैं। हमें लगता है कि इस कर्ज का उपयोग जबरदस्ती फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है।
लू ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र के देशों से बात कर रहा है कि वे अपने फैसले खुद लें और किसी बाहरी साझेदार के दबाव में न आएं। लू ने कहा कि इस मामले में हम भारत और उसके पड़ोसी देशों से भी बात कर रहे हैं कि कैसे हम इन देशों को अपने निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय नहीं लेने चाहिए, जिससे चीन सहित किसी भी बाहरी भागीदार द्वारा उन्हें मजबूर किया जा सके। एक सवाल के जवाब में लू ने कहा कि चीन के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच गंभीर बातचीत हुई है। लू ने कहा कि हाल ही में हुई चीनी जासूसी गुब्बारे की घटना से पहले और बाद में में हमने चीन के बारे में गंभीर बातचीत की है और मुझे पूरी उम्मीद है कि बातचीत जारी रहेगी।