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यूक्रेन पर हमला: 'स्विफ्ट सिस्टम' से रूस को निकालने से इसलिए पीछे हट गया अमेरिका

Fri, 25 Feb 2022 07:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

एक रिपोर्ट के मुताबिक स्विफ्ट सिस्टम के तहत प्रति वर्ष औसतन चार करोड़ 20 लाख मैसेज का आदान-प्रदान होता है। उनमें रूस के लेन-देन का हिस्सा 1.5 फीसदी है। अमेरिका और यूरोपीय देशों का कहना है कि स्विफ्ट सिस्टम से रूस को हटाने का रूसी अर्थव्यवस्था पर तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के असर होंगे...
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स्विफ्ट सिस्टम - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो वैश्विक भुगतान की प्रणाली स्विफ्ट से बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन गुरुवार को रूस के सचमुच हमला कर देने के कई घंटे बाद प्रेस के सामने आए राष्ट्रपति जो बाइडन ने स्वीकार किया कि यूरोपीय देश इसके लिए तैयार नहीं हैं। बाइडन ने कहा- ‘ऐसा करने का विकल्प हमेशा ही हमारे पास है। लेकिन फिलहाल यूरोप ये कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है।’

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जबकि विश्लेषकों का कहना है कि रूस पर अगर किसी कदम से सचमुच फर्क पड़ेगा, तो वह स्विफ्ट सिस्टम से उसे निकालना ही है। बाकी प्रतिबंधों का असर कम से कम रखने की तैयारी उसने पहले से कर ली है।

क्या है स्विफ्ट सिस्टम

सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकॉम्युनिकेशन (स्विफ्ट) को 1973 में बनाया गया था। इसका मुख्यालय बेल्जियम में है। इसका संचालन नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम अन्य बैंकों की सहायत से करता है। जिन बैंकों की इसमें भूमिका है, उनमें यूएस फेडरल रिजर्व सिस्टम, बैंक ऑफ इंग्लैंड, और यूरोपियन सेंट्रल बैंक शामिल हैं। स्विफ्ट एक परंपरागत बैंक की तरह काम करता है। वह फंड ट्रांसफर नहीं करता। वह एक मेसेजिंग सिस्टम से काम करता है, जिससे 200 से अधिक देशों के 11 हजार से ज्यादा वित्तीय संस्थान जुड़े हुए हैं। जब कोई लेन-देन होने वाला होता है, तो स्विफ्ट मैसेजिंग सिस्टम बैंकों को सतर्क कर देता है।

अमेरिकी वेबसाइट एनबीसी.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्विफ्ट सिस्टम के तहत प्रति वर्ष औसतन चार करोड़ 20 लाख मैसेज का आदान-प्रदान होता है। उनमें रूस के लेन-देन का हिस्सा 1.5 फीसदी है। अमेरिका और यूरोपीय देशों का कहना है कि स्विफ्ट सिस्टम से रूस को हटाने का रूसी अर्थव्यवस्था पर तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के असर होंगे। इससे रूस हर तरह के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन से कट जाएगा। उनमें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बिक्री से होने वाले मुनाफे से जुड़े ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं। रूस को विदेशों से जो राजस्व प्राप्त होता है, उनमें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बिक्री का हिस्सा 40 फीसदी भी ज्यादा है।

यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई रोक देगा रूस

लेकिन जानकारों का कहना है कि स्विफ्ट से काटे जाने पर रूस निश्चित रूप से यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई रोक देगा। इससे वहां बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। इसीलिए यूरोपीय देश यह सख्त कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।

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हेगर चेमाली बराक ओबामा के शासन काल में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सीरिया और लेबनान विभागों के प्रमुख थे। उन्होंने टीवी चैनल एमएसएनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि स्विफ्ट से रूस को हटाना बेहद कठिन कदम होगा। उसकी प्रतिक्रिया ये कदम उठाने वाले देशों को झेलनी होगी। उन्होंने कहा कि आम तौर पर देशों के लेन-देन को पूरी तरह जाम करने के कदम सीरिया या इराक जैसे देशों के खिलाफ उठाए जाते हैं।

स्विफ्ट से रूस को हटाने के बारे में पूछे गए सवाल पर बाइडेन ने कहा कि इस मामले में उन्हें यूरोपीय देशों के समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा- ऐसा लगता है कि यूरोपीय देश इससे कम सख्त कदम उठाना चाहते हैं। रूस यूरोप के लिए ऊर्जा की सप्लाई का एक प्रमुख स्रोत है।

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