राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर में इस संधि के नवीनीकरण के संकेत दिए थे, लेकिन पिछले महीने उन्होंने अपना रुख बदल दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इसके समाप्त होने से कोई आपत्ति नहीं है और किसी भी नई संधि में अन्य देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
अमेरिका और रूस के बीच दुनिया के सबसे खतरनाक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करने वाला ऐतिहासिक परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता टूट गया। इस पर क्रेमलिन ने गुरुवार को खेद जताया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि वह मौजूदा सीमाओं को बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं और एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि चाहते हैं।
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इस समझौते के खत्म होने के साथ ही बीती आधी सदी से अधिक समय में पहली बार दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं रह गई है। इससे बिना रोक-टोक परमाणु हथियारों की दौड़ की आशंका बढ़ गई है।
ट्रंप की पेशकश को ठुकरा चुका है चीन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल संकेत दिया था कि अगर अमेरिका भी सहमत होता है तो रूस एक और वर्ष तक समझौते की सीमाओं का पालन करने को तैयार है। ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ट्रंप का कहना है कि किसी भी नई संधि में चीन को शामिल किया जाना चाहिए, जिसे बीजिंग ने ठुकरा दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'न्यू स्टार्ट जैसी खराब तरीके से निकले समझौते को बढ़ाने के बजाय हमें अपने परमाणु विशेषज्ञों से एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि पर काम कराना चाहिए, जो लंबे समय तक टिक सके।'
क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि पुतिन ने बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में संधि की समाप्ति का मुद्दा उठाया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस समझौते के टूटने को 'नकारात्मक' रूप में देखता है और इसे दुर्भाग्यपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि रूस परमाणु स्थिरता को लेकर जिम्मेदार रुख बनाए रखेगा और मुख्य रूप से अपने राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होगा। पेस्कोव ने यह भी कहा कि अगर रचनात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो रूस संवाद के लिए तैयार है।
ट्रंप ने कहा है कि वह परमाणु हथियारों पर सीमाएं चाहते हैं, लेकिन चीन को भी किसी नई संधि का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि 21वीं सदी में चीन को शामिल किए बिना वास्तविक हथियार नियंत्रण संभव नहीं है, क्योंकि उसका परमाणु भंडार तेजी से बढ़ रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका और रूस की तुलना में चीन का परमाणु शस्त्रागार काफी छोटा है और मौजूदा दौर में वह परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल नहीं होगा।
चीन ने न्यू स्टार्ट के टूटने पर खेद जताते हुए अमेरिका से रूस के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की।
क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि रूस चीन के रुख का सम्मान करता है और यह भी दोहराया कि अगर व्यापक संधि पर बातचीत होती है तो नाटो देशों फ्रांस और ब्रिटेन के परमाणु शस्त्रागार को भी शामिल किया जाना चाहिए।
हथियार नियंत्रण समर्थकों ने न्यू स्टार्ट के खत्म होने पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक खतरनाक त्रिपक्षीय परमाणु हथियार दौड़ शुरू हो सकती है।