US-Russia: Joe Biden and Vladimir Putin
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अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने हाल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के वरिष्ठ सलाहकारों से बातचीत की है। इसका मकसद यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ी लड़ाई छिड़ने के जोखिम को कम करना है। इस सिलसिले में सुलिवान की पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के साथ संपर्क बना है। ये खास खबर अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को दी।
इसके पहले रविवार को अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की को रूस के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की सलाह दी है। हालांकि अखबार ने कहा कि अमेरिका इसलिए यूक्रेन और रूस में सीधी बातचीत चाहता है, ताकि यूक्रेन और पश्चिमी देशों पर जिद्दी रुख अपनाने के लग रहे आरोपों का मुकाबला किया जा सके।
वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी इसी रिपोर्ट में बताया कि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की के साथ अपनी बातचीत में रूस के साथ वार्ता शुरू कराने के लिए मध्यस्थता करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे जेलेन्स्की ने ठुकरा दिया। उधर रविवार को ही न्यूयॉर्क टाइम्स में एक विश्लेषण छापा, जिसमें इस संभावना की चर्चा की गई कि क्या भारत पश्चिमी देशों और रूस के बीच प्रभावी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन तमाम खबरों का निष्कर्ष यह है कि परमाणु युद्ध के बढ़े खतरे के बीच अब अमेरिका और उसके साथी देश यूक्रेन मसले पर तनाव घटाने की कोशिश में जुट गए हैं। ये भी संभव है कि पश्चिम में गहराते जा रहे ऊर्जा संकट और बढ़ रही महंगाई के बीच लंबे खिंचते इस युद्ध का अब वे कोई हल ढूंढने की कोशिश में हों।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि सुलिवान की रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलाई पेत्रुशेव से भी बातचीत हुई है। बाइडन प्रशासन के सूत्रों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में रूस के साथ संपर्क बनने की पुष्टि की। इस सवाल पर उशाकोव और पेत्रुशेव के साथ सुलिवान की क्या बातचीत हुई, इन सूत्रों ने ज्यादा विवरण देने से इनकार कर दिया। उधर वॉल स्ट्रीट जर्नल के संपर्क पर क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।
टीकाकारों के मुताबिक यूक्रेन को खुल को समर्थन देने और रूस के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने के बावजूद अब बाइडन प्रशासन में यह राय बनी है कि रूस के साथ संपर्क रखना उचित होगा। कई सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि सुलिवान रूस के साथ संवाद कायम रखने के समर्थक रहे हैं। जबकि प्रशासन के अंदर कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं, जिनकी राय में अभी रूस के साथ कूटनीतिक या सैनिक स्तर की वार्ता से कोई हल नहीं निकलेगा।
बराक ओबामा प्रशासन के दौरान नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में अमेरिका के राजदूत रह चुके इवो डैलडेर ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा- ‘मेरी राय में परमाणु संपन्न शक्तियों के बीच संवाद कायम रखना हमेशा ही महत्त्वपूर्ण होता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दूसरा पक्ष क्या सोच रहा है। इससे दुर्घटनावश युद्ध छिड़ जाने की आशंका से बचा जा सकता है।’