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US: ब्लिंकन बोले- धार्मिक आजादी के मामले में चीन-पाकिस्तान 'विशेष चिंता वाले देश'; पाकिस्तान ने कही यह बात

Mon, 08 Jan 2024 11:59 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क / इस्लामाबाद

सार

धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के आरोप में अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान को 'विशेष चिंता वाला देश' करार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने 25 साल पुराने कानून से जुड़ी देश की विदेश नीति पर अहम बयान भी दिया है।
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अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका ने चीन के अलावा उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को 'धार्मिक स्वतंत्रता के विशेष रूप से गंभीर उल्लंघन' में शामिल 'विशेष चिंता वाला देश' बताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि 1998 में कांग्रेस से कानून पारित होने के बाद 'धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता' को आगे बढ़ाना अमेरिकी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य रहा है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत ब्लिंकन ने पिछले सप्ताह कई देशों को लेकर चिंता जताई थी।
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अमेरिका ने इन देशों को नामित किया
उन्होंने कहा था कि इस कानून के तहत, बर्मा (अब म्यांमार), चीन, क्यूबा, उत्तर कोरिया, पूर्वी अफ्रीकी देश- इरिट्रिया, ईरान, निकारागुआ, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, तजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान 'विशेष चिंता वाले देश' हैं। अमेरिका की तरफ से नामित करने के मायने हैं कि इन देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का विशेष रूप से गंभीर उल्लंघन होता है। उल्लंघन में शामिल होने या उल्लंघन सहन करने पर भी अमेरिका इस कानून के तहत देशों को नामित करता है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को 'विशेष चिंता का देश' घोषित करने को अमेरिका का 'पक्षपातपूर्ण' आकलन करार दिया। पाकिस्तान ने अमेरिकी आकलन को खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने कहा, पाकिस्तान एक बहुलवादी देश है, जिसमें अंतर-धार्मिक सद्भाव की समृद्ध परंपरा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने संविधान के अनुरूप धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक उपाय किए हैं।
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विदेश मंत्रालय ने कहा, हम अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा को सिरे से खारिज करते हैं। हम इस बात से बेहद निराश हैं कि यह पदनाम जमीनी हकीकत से अलग, पक्षपातपूर्ण और मनमाने मूल्यांकन पर आधारित है। पाकिस्तान का दृढ़ विश्वास है कि धार्मिक असहिष्णुता, जेनोफोबिया और इस्लामोफोबिया की समकालीन चुनौती का मुकाबला आपसी समझ और सम्मान के आधार पर किया जा सकता है। पाकिस्तान ने ऐसी परेशानी दूर करने के लिए रचनात्मक जुड़ाव और सामूहिक प्रयासों का आह्वान भी किया।
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