भारत और अमेरिका की ओर जारी एक साझा बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकार्बनन (डीकार्बोनाइजेशन) के प्रयासों पर प्रकाश डाला। दोनों ने देशों ने कहा कि जलवायु, उर्जा संक्रमण (एनर्जी ट्रांजिशन) और राष्ट्रों की उर्जा सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु उर्जा एक जरूरी संसाधन है। बयान में दोनों नेताओं ने घरेलू बाजार और निर्यात के लिए अगली पीढ़ी की छोटी मॉड्यूलर रिएक्टर प्रौद्योगिकियों को विकसित करने पर चल रही चर्चा का जिक्र किया।
इसमें आगे कहा गया है कि राष्ट्रपति बाइडन और प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए भारतीय परमाणु उर्जा निगम (एनपीसीआईएल) और वेस्टिंगहाउस बिजली कंपनी (डब्ल्यूईसी) के बीच चल रही बातचीत का जिक्र किया। बयान में आगे कहा गया है, दोनों नेताओं ने कोवड़ा परमाणु परियोजना (आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में) के लिए अमेरिकी उर्जा विभाग (डीओई) और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के बीच गहन विचार-विमर्श का स्वागत किया।
बयान में आगे कहा गया है कि उन्होंने घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए एक सहयोग मोड में अगली पीढ़ी की छोटी मॉड्यूलर रिएक्टर प्रौद्योगिकियों को विकसित करने पर चल रही चर्चा का भी जिक्र किया। अमेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की और कहा कि वह इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ चर्चा जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
एनएसजी का गठन 1974 में एक गैर-परमाणु-हथियार वाले देश द्वारा परमाणु उपकरण के विस्फोट के बाद किया गया था। इस समूह में अभी 48 देश शामिल हैं। यह विशिष्ट समूह परमाणु प्रौद्योगिकी और विखंडनीय सामग्रियों के कारोबार से जुड़ा है, साथ ही यह परमाणु हथियारों के अप्रसार से भी जुड़ा हुआ है। चीन, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में शामिल होने के प्रयासों का इस आधार पर विरोध करता आया है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्तक्षार नहीं किए हैं।
इस समूह के सदस्य देशों में अर्जेंटीना, साइप्रस, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, चेक गणराज्य, इटली, नॉर्वे, स्पेन ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जापान, पोलैंड, स्वीडन, बेलारूस, एस्टोनिया, कजाकिस्तान, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड बेल्जियम, फिनलैंड, लातविया, रोमानिया, तुर्की, ब्राजील, फ्रांस, लिथुआनिया, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, बुल्गारिया, जर्मनी, लक्जमबर्ग, रूस, ब्रिटेन, कनाडा, ग्रीस, माल्टा, सर्बिया, अमेरिका चीन, हंगरी, मेक्सिको, स्लोवाकिया, क्रोएशिया, आइसलैंड, नीदरलैंड और स्लोवेनिया शामिल हैं।
अमेरिकी कारोबारियों की पुरजोर वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में निवेश करने का यही समय है, क्योंकि दोनों देशों की सरकारों ने कारोबारियों और कंपनियों के लिए अवसर का लाभ उठाने और 'प्ले और प्रोस्पर' बनने के लिए जमीनी काम किया है।
अमेरिकी कारोबारियों से बोले पीएम मोदी- भारत में निवेश करने का यह सही समय
अमेरिकी कारोबारियों की पुरजोर वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में निवेश करने का यही समय है, क्योंकि दोनों देशों की सरकारों ने कारोबारियों और कंपनियों के लिए अवसर का लाभ उठाने और 'प्ले और प्रोस्पर' बनने के लिए जमीनी काम किया है। उन्होंने शुक्रवार को यहां केनेडी सेंटर में भारत और अमेरिका के कारोबारियों के साथ-साथ भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अन्य प्रमुख सदस्यों को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत-अमेरिका साझेदारी दृढ़ विश्वास, साझा प्रतिबद्धताओं और करुणा की है।
भारत में विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही प्रगति पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने पेशेवरों को भारत के साथ साझेदारी बनाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, वाशिंगटन डीसी में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख पेशेवरों के साथ बातचीत हुई। खुशी है कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। उन्होंने भारत द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों पर जोर देते हुए इस बात को दोहराया कि यह भारत की विकास गाथा में निवेश करने का समय है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 1,000 प्रमुख पेशेवरों ने भाग लिया।